बांग्लादेश संभालने में नाकाम मोहम्मद यूनुस! अल्पसंख्यक असुरक्षित और चरम पर अराजकता, जानें कैसे देश में चला रहे भारत विरोधी एजेंडा
बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर विपक्षी BNP ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हालात संभालने में नाकामी का आरोप लगाया है. यूनुस सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं और भारत-बांग्लादेश रिश्तों में भी भारी तनाव देखने को मिल रहा है. पाकिस्तान के करीब जाने और भारत विरोधी बयानों ने बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है.
Bangladesh Crisis: बांग्लादेश इस वक्त गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. अंतरिम सरकार के मुखिया और मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की मुश्किलें अब देश के भीतर ही बढ़ती नजर आ रही हैं. खुद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने यूनुस सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और हालात संभालने में नाकाम रहने का सीधा आरोप लगाया है. यह वही BNP है, जो अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के दौर में मुख्य विपक्षी दल थी.
BNP का यूनुस सरकार पर सीधा हमला
BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने ढाका में कहा कि अंतरिम दौर में जो अशांति देखने को मिल रही है, उसकी बड़ी वजह सरकार की विफलता है. उन्होंने कहा कि पार्टी को उम्मीद थी कि प्रोफेसर यूनुस के नेतृत्व में सरकार कम से कम कुछ महीनों के लिए ही सही, लेकिन देश को बेहतर तरीके से चला पाएगी। हालांकि, जमीनी हालात इससे बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं.
फखरुल ने चुनावों की तारीख 12 फरवरी 2026 घोषित करने के लिए सरकार का आभार जरूर जताया, लेकिन साथ ही चेताया कि सिर्फ तारीख तय कर देना काफी नहीं है. उनके मुताबिक, चुनाव कराने के लिए अनुकूल माहौल बनाना और सक्रिय कदम उठाना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जिसमें वह फिलहाल कमजोर दिख रही है.
BNP-जमीयत गठबंधन और राजनीतिक गणित
इसी बीच BNP ने जमीयत उलमा-ए-इस्लाम (JUI) बांग्लादेश के साथ सीट शेयरिंग समझौते का ऐलान भी कर दिया है. जमीयत की विचारधारा कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी से अलग मानी जाती है. जहां जमीयत पारंपरिक इस्लामी कानून और उलेमाओं पर केंद्रित है, वहीं जमात-ए-इस्लामी एक कट्टर इस्लामी राष्ट्र की वकालत करती है और पाकिस्तान समर्थक मानी जाती है. जमात-ए-इस्लामी पर भारत विरोधी रुख रखने के आरोप भी लगते रहे हैं और यूनुस सरकार को उसका अप्रत्यक्ष समर्थन भी चर्चा में है.
कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले
यूनुस सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती बताई जा रही है. इसके साथ ही अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ा दी है. इन हालातों का असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी साफ दिख रहा है। अगस्त 2024 में सत्ता संभालने के बाद यूनुस ने विदेश नीति की दिशा बदली और भारत के साथ ऐतिहासिक रिश्तों की कीमत पर पाकिस्तान के साथ मेल-मिलाप की कोशिशें तेज कर दीं.
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बढ़ता तनाव
इसी तनाव के बीच भारत के बांग्लादेश में उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को ढाका के विदेश मंत्रालय में तलब किया गया. यह बीते 10 दिनों में दूसरी बार और यूनुस सरकार के कार्यकाल में कम से कम छठी बार है, जब भारतीय उच्चायुक्त को बुलाया गया है. भारत में बांग्लादेश के दूतावासों और मिशनों के बाहर हुए प्रदर्शनों के बाद यह कदम उठाया गया.
आतंकी संगठन से जुड़े आरोपी की रिहाई
यूनुस के सत्ता में आने के बाद एक और बड़ा विवाद सामने आया, जब अल-कायदा से प्रेरित आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के सरगना मुफ्ती जसीमुद्दीन रहमानी को जेल से रिहा कर दिया गया. रहमानी एक ब्लॉगर-एक्टिविस्ट की हत्या का दोषी था और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से भी जुड़ा रहा है. भारत में असम पुलिस की STF ने इस संगठन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार कर हथियार, विस्फोटक और आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए थे.
यूनुस का पूर्वोत्तर भारत पर बयान और पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
यूनुस के चीन दौरे के दौरान दिए गए बयान ने भी विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लैंडलॉक्ड बताते हुए बांग्लादेश को उनका समुद्र का एकमात्र संरक्षक कहा और चीन के लिए इसे बड़े अवसर के रूप में पेश किया. इस बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. बाद में बैंकॉक में BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनुस से मुलाकात कर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई और माहौल खराब करने वाली बयानबाजी से बचने की सलाह दी.
कानून-व्यवस्था पर भारत को दोष देने की कोशिश
कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद ढाका प्रशासन ने आरोपियों के भारत भागने की आशंका जताई, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया. बाद में खुद बांग्लादेशी जांच एजेंसियों ने स्वीकार किया कि उनके पास न तो आरोपियों की लोकेशन की जानकारी है और न ही भारत भागने का कोई ठोस सबूत.
पाकिस्तान के करीब, भारत से दूरी
यूनुस लगातार पाकिस्तान के साथ रिश्ते मजबूत करने की बात कर रहे हैं. उन्होंने व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और यहां तक कि पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों को बांग्लादेश बुलाने की पहल की है. पूर्व राजनयिकों का कहना है कि बांग्लादेश में बढ़ती भारत विरोधी बयानबाजी के पीछे पाकिस्तान का प्रभाव भी हो सकता है.
ढाका में भारतीय प्रतिष्ठानों पर खतरा
बढ़ती असुरक्षा के चलते भारत को चटगांव, राजशाही और खुलना में वीजा आवेदन केंद्र बंद करने पड़े हैं. ढाका में भारतीय उच्चायोग के पास कट्टरपंथी संगठनों के प्रदर्शन ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए. हालांकि, यूनुस सरकार भारत की चिंताओं को लगातार खारिज करती रही है.
कुल मिलाकर, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिख रहा है, जहां आंतरिक अस्थिरता, कट्टरपंथ और बिगड़ते भारत-बांग्लादेश संबंध देश की राजनीति और सुरक्षा दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं.










