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Trump 2.0: ट्रम्प टीम को संभालेंगे ये दिग्गज, इमिग्रेशन पर सख्ती, पाकिस्तान, चीन और भारत पर कैसे डालेगा असर?

Trump 2.0: राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रम्प अपने शासन के लिए टीम तैयार करने में लगे हैं. वे अपनी टीम में जैसे लोगों को ले रहे हैं, जो भारत के समर्थक रहे हैं लेकिन चीन और पाकिस्तान के घोर विरोधी के तौर पर जाने जाते हैं.

Trump 2.0: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारी जीत के बाद अपने 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) पोल अभियान के अनुसार अपनी टीम बनाना शुरू कर दिया है. उनकी टीम के सभी सदस्य ट्रंप के वफादार हैं, जो इमिग्रेशन, बॉर्डर सिक्योरिटी और युद्ध जैसे मुद्दों पर अपने सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं. 

डोनाल्ड ट्रम्प की टीम में माइक वाल्ट्ज और मार्को रुबियो शामिल हैं, जो अमेरिका-भारत साझेदारी के समर्थक हैं, वहीं चीन और पाकिस्तान के खिलाफ हैं. जबकि स्टीफन मिलर और टॉम होमन इमिग्रेशन के सख्त खिलाफ हैं.

वीजा पर सख्ती किसे पड़ेगा भारी?

अपने पिछले कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प के एच-1बी वीजा कार्यक्रम का अमेरिका में भारतीय पेशेवरों पर काफी प्रभाव पड़ा था. उन्होंने विदेशी कर्मचारियों के लिए वेतन आवश्यकताओं को बढ़ाने का प्रयास किया था और भारतीय आईटी पेशेवरों और प्रौद्योगिकी फर्मों के लिए अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए थे.

इसी तरह की नीति अमेरिकी नौकरी बाजारों में भारतीय श्रमिकों को प्रभावित कर सकती है. इसके अतिरिक्त, सख्त इमिग्रेशन कानून भारतीय तकनीकी फर्मों को अन्य बाजारों की तलाश करने या अधिक घरेलू अवसर बनाने में निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.

ट्रम्प टीम पर एक नजर और जानें कि वे अमेरिका की विदेश नीति पर किस प्रकार प्रभाव डाल सकती हैं:

माइक वाल्ट्ज

एक सेवानिवृत्त आर्मी नेशनल गार्ड अधिकारी और युद्ध के दिग्गज 50 वर्षीय माइक वाल्ट्ज पूर्व-मध्य फ्लोरिडा से तीन बार जीओपी कांग्रेस के सदस्य थे और अमेरिकी सदन के लिए चुने गए पहले ग्रीन बेरेट थे. 

वाल्ट्ज को चीन के प्रति आक्रामक माना जाता है, और उन्होंने कोविड-19 की उत्पत्ति में चीन की कथित संलिप्तता और अल्पसंख्यक मुस्लिम उइगर आबादी के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार का विरोध किया है.

वाल्ट्ज ने कई मौकों पर अमेरिका के लिए भारत के महत्व को दोहराया है. 2023 में वाल्ट्ज स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए भारत आए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी.

मार्को रुबियो

फ्लोरिडा में जन्मे 53 वर्षीय राजनीतिज्ञ मार्को रुबियो को ट्रम्प ने विदेश मंत्री बनाने का फैसला लिया है. वह पद पर काम करने वाले पहले लैटिनो बनने की राह पर हैं. उन्होंने चीन, ईरान और क्यूबा सहित अमेरिका के जियो-पॉलिटिक्स दुश्मनों के संबंध में एक मज़बूत विदेश नीति की वकालत की है.

वह भारत-अमेरिका साझेदारी के समर्थक हैं. रुबियो ने जुलाई 2024 में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने के लिए यूएस-भारत रक्षा सहयोग अधिनियम पेश किया था. वहीं 2020 में उन्होंने जबरन उइगर श्रम से बने चीनी सामानों के आयात को रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने 2021 में हस्ताक्षर करके कानून बना दिया.

स्टीफन मिलर

ट्रम्प ने अपने नए प्रशासन में नीति के उप प्रमुख के रूप में लंबे समय से सलाहकार रहे स्टीफन मिलर को नियुक्त किया है , जो इमिग्रेशन को लेकर काफी सख्त हैं. इमिग्रेशन पर उनकी सख्ती का असर चीन, पाकिस्तान समेत कई एशियाई देशों पर देखने को मिलेगा. हालांकि, भारत को लेकर वो अपना रुख नरम रखते हैं. 

टॉम होमन

ट्रम्प ने पूर्व इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) निदेशक टॉम होमन को अपना "बॉर्डर ज़ार" नियुक्त किया, जिसमें अवैध विदेशियों को उनके मूल देश में वापस भेजने के काम वो करेंगे. इसका असर भी एशियन देशों पर देखने को मिलेगा. 

एलीज़ स्टेफनिक

ट्रम्प ने एलीस स्टेफनिक को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत बनाया है.  उनका चीन के लिए आक्रामक रुख और भारत समर्थित आवाज संयुक्त राष्ट्र में भी सुनने को मिल सकता है. वो ट्रम्प की सबसे वफादार में से एक हैं. 

ली ज़ेल्डिन

ट्रम्प ने 44 वर्षीय ली ज़ेल्डिन को पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के अपने प्रशासक के रूप में चुना है. ज़ेल्डिन, जो 2022 के न्यूयॉर्क गवर्नर की दौड़ में कैथी होचुल से हार गए थे, ट्रम्प के करीबी बने हुए हैं.

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