'भारत तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं', पाकिस्तान की धरती से S Jaishankar के नाम आया पैगाम, हुक्मरानों को लगी तिखी मिर्ची
बलूच नेता मीर यार बलोच ने चेतावनी दी है कि चीन आने वाले महीनों में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है. उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर CPEC और चीन-पाक गठजोड़ को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया. मीर यार बलोच ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना करते हुए बलूचिस्तान की स्वतंत्रता और भारत के साथ सहयोग की बात दोहराई.
Mir Yar Baloch to India: बलूचिस्तान के प्रमुख राष्ट्रवादी नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने चीन और पाकिस्तान के बीच गहराते रणनीतिक गठजोड़ को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने दावा किया है कि आने वाले कुछ महीनों में चीन अपनी सैन्य टुकड़ियों को पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में तैनात कर सकता है.
मीर यार बलोच ने यह बात भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे एक खुले पत्र में कही है. उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान पिछले कई दशकों से पाकिस्तान के नियंत्रण में दमन, राज्य-प्रायोजित हिंसा और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहा है.
Open letter to Honorable Foreign Minister of #Bharat Shri @DrSJaishankar ji
From,
Baloch Representative,
Republic of Balochistan
State.
The Honorable Dr. S. Jaishankar,
Minister of External Affairs,
Government of Bharat,
South Block, Raisina Hill,
New Delhi – 110011
January… https://t.co/WdjaACsG2V pic.twitter.com/IOEusbUsOB
मई 2025 में स्वतंत्रता की घोषणा, अब कूटनीतिक मोर्चे पर तैयारी
गौरतलब है कि मई 2025 में बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने पाकिस्तान से स्वतंत्रता की घोषणा की थी. अब मीर यार बलोच ने ऐलान किया है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान वर्ष 2026 के पहले सप्ताह में '2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमैटिक वीक' मनाएगा.
इस पहल का मकसद बलूचिस्तान को दुनिया के देशों से सीधे संवाद करने का मंच देना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बलूच लोगों की स्थिति और संघर्ष को रखा जा सके.
नए साल पर भारत को संदेश, ऑपरेशन सिंदूर की सराहना
नए साल 2026 के मौके पर मीर यार बलोच ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को संदेश भेजते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई की जमकर तारीफ की.
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसके तहत अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था.
मीर यार बलोच के मुताबिक, यह कार्रवाई भारत के साहस, आत्मविश्वास और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों का ज़िक्र
अपने संदेश में उन्होंने लिखा, 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के छह करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से, हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी सम्मानित नागरिकों को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं.'
उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक संबंधों का उल्लेख करते हुए हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) को साझा विरासत का प्रतीक बताया.
भारत को खुला समर्थन, पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
मीर यार बलोच ने भारत के प्रति अटूट समर्थन जताते हुए कहा कि बलूच लोग शांति, विकास, व्यापार, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग चाहते हैं.
उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि पिछले 79 वर्षों से बलूचिस्तान पर जबरन कब्जा, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद और अमानवीय अत्याचार किए जा रहे हैं.
उनके शब्दों में, 'अब समय आ गया है कि इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि बलूचिस्तान को स्थायी शांति और संप्रभुता मिल सके.'
CPEC और चीनी सेना को लेकर बड़ा अलर्ट
मीर यार बलोच ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान और चीन की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को बेहद खतरनाक मानते हैं.
उनका दावा है कि CPEC अब अपने अंतिम चरण में है और यदि बलूच प्रतिरोध और रक्षा बलों को मजबूत नहीं किया गया, तो चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है.
'चीनी बूट्स' से भारत और बलूचिस्तान दोनों को खतरा
मीर यार बलोच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि 6 करोड़ बलूच लोगों की इच्छा के खिलाफ बलूचिस्तान की ज़मीन पर चीनी सैनिकों ने कदम रखा, तो यह केवल बलूचिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के लिए भी एक अकल्पनीय खतरा होगा.
उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और टकराव को जन्म दे सकती है.
चीन और पाकिस्तान का इनकार, भारत की आपत्ति बरकरार
हालांकि, चीन और पाकिस्तान लगातार इस बात से इनकार करते रहे हैं कि CPEC के तहत किसी तरह का सैन्य विस्तार किया जा रहा है. उनका दावा है कि यह परियोजना पूरी तरह आर्थिक है.
वहीं भारत पहले से ही CPEC का विरोध करता रहा है, क्योंकि यह परियोजना पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) से होकर गुजरती है और भारत की संप्रभुता व सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है.
क्यों अहम है मीर यार बलोच का यह बयान?
मीर यार बलोच का यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. यदि बलूचिस्तान में चीनी सैन्य मौजूदगी की आशंका सच होती है, तो इसका असर केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोण में नई रणनीतिक चुनौती खड़ी हो सकती है.
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