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क्या है मालदीव का नया मीडिया कानून और इसे लेकर पत्रकार और विपक्ष क्यों कर रहे हैं विरोध?

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने एक नए मीडिया कानून को मंजूरी दे दी है, जिससे देश में प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा मंडरा रहा है. Maldives Media and Broadcasting Regulation Act के तहत पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, उनके लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं और संस्थानों को बंद किया जा सकता है.

Maldives Media and Broadcasting Regulation Act: मालदीव में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक टकराव खड़ा हो गया है. राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने एक नए मीडिया कानून पर दस्तखत कर दिए हैं, जिसे पत्रकारों और विपक्षी दलों ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है. इस कानून के तहत पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और यहां तक कि मीडिया संस्थानों को बंद भी किया जा सकता है.

नया मीडिया कानून क्या है?

इस कानून का नाम Maldives Media and Broadcasting Regulation Act है. संसद ने इसे पिछले हफ्ते बहुमत से पारित किया.

मालदीव मीडिया काउंसिल (MMC) और मालदीव ब्रॉडकास्टिंग कमीशन (BroadCom) को खत्म कर एक नई मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग कमीशन बनाई जाएगी.

इस आयोग में 7 सदस्य होंगे — जिनमें 3 संसद नियुक्त करेगी और 4 पंजीकृत मीडिया समूह चुनेंगे. हालांकि, संसद को सभी सदस्यों को हटाने का भी अधिकार रहेगा.

कानून के अनुसार पत्रकारों को देश के संविधान, इस्लाम, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक मूल्यों और मानवाधिकारों का सम्मान करना होगा.

आयोग को यह शक्ति दी गई है कि वह पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की जांच करे, उन्हें जुर्माना लगाए, उनका लाइसेंस निलंबित करे या संस्थान को बंद कर दे.

जुर्माना: व्यक्तिगत पत्रकार पर अधिकतम 1,620 अमेरिकी डॉलर (करीब 1.42 लाख रुपये) और मीडिया कंपनियों पर 6,485 अमेरिकी डॉलर (करीब 5.71 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया जा सकता है.

अगर किसी रिपोर्ट को फर्जी या भ्रामक माना गया तो प्रकाशन को उसे सुधारना और माफी मांगनी होगी, हालांकि फेक न्यूज़ की परिभाषा साफ़ नहीं है.

पुलिस को यह अधिकार है कि वह ऐसे प्रसारण रोक दे जो कानून का उल्लंघन करते हों.

कानून पास होने की प्रक्रिया भी विवादित

यह बिल संसद के एक विशेष सत्र में पारित किया गया, जिसमें विपक्षी सांसदों ने जबरदस्त विरोध किया. डिप्टी स्पीकर अहमद नाज़िम ने सात विपक्षी सांसदों को सदन से बाहर कर दिया और फिर वोटिंग कराई.

संसद के 93 सदस्यों में से 60 ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि केवल एक विपक्षी सांसद ने विरोध किया.

राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू की पार्टी पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (PNC) और उसके सहयोगियों के पास संसद में सुपरमेजॉरिटी है.

बिल को लेकर संसद के बाहर भी विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई और दो लोगों को हिरासत में लिया गया.

पत्रकारों को संसद की कार्यवाही कवर करने की इजाजत नहीं दी गई. मालदीव जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (MJA) के अध्यक्ष और पूर्व सदस्य को भी सदन से बाहर कर दिया गया.

पत्रकार और विपक्ष क्यों विरोध कर रहे हैं?

कई अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय पत्रकार संगठनों ने इस कानून को काला कानून और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है.

MJA ने कहा कि यह कानून पत्रकारों को डराने और मीडिया पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाने के लिए लाया गया है.

कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने चेतावनी दी कि यह कानून प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया की स्वायत्तता के लिए गंभीर खतरा है.

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (IFJ) और कई अन्य संगठनों ने इसे तानाशाही वाला कदम कहा.

विपक्षी पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) ने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया और जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की.

पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व UNGA अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने कहा, 'एक सरकार जो पत्रकारों की आवाज़ दबाती है, वह सच का सामना करने से डरती है.'

पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने इसे प्रेस स्वतंत्रता का अंत बताया.

सरकार का बचाव

सरकार का कहना है कि यह कानून मीडिया को नियंत्रित करने के लिए नहीं बल्कि एक ठीक - ठाक नियामक ढांचा बनाने और झूठी सूचनाओं को रोकने के लिए लाया गया है.

विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने कहा कि व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट्स पर यह कानून लागू नहीं होगा.

उनका दावा है कि नया कानून मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन और कंटेंट में हेरफेर जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा.

मालदीव का लोकतांत्रिक सफर

मालदीव की आबादी सिर्फ़ 5 लाख है और यह दुनिया के सबसे बड़े टूरिस्ट डेस्टिनेशनों में से एक है. 2008 में इसने 30 साल की तानाशाही से निकलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई, लेकिन तब से राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष लगातार जारी है.

कुल मिलाकर, राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के इस नए मीडिया कानून ने मालदीव में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. पत्रकारों और विपक्ष का कहना है कि यह मीडिया को पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में लेने की कोशिश है, जबकि सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और झूठी खबरों पर लगाम बताकर बचाव कर रही है.

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