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क्या हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बेटे बैरन का बदला ले रहे डोनाल्ड ट्रम्प? जानिए इसके पीछे की पूरी सच्चाई

Donald Trump VS Harvard University: ट्रम्प और हार्वर्ड के बीच बढ़ते तनाव के पीछे व्यक्तिगत कारणों की अटकलें तेज़ हो गई हैं, लेकिन मेलानिया ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि उनके बेटे ने हार्वर्ड में कभी आवेदन नहीं किया. यह विवाद अब शिक्षा, राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ता जा रहा है.

Donald Trump VS Harvard University: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच चल रहा विवाद अब एक नई बहस को जन्म दे रहा है. सोशल मीडिया पर चर्चा है कि ट्रम्प के सबसे छोटे बेटे बैरन ट्रम्प को हार्वर्ड, कोलंबिया और स्टैनफोर्ड जैसी टॉप यूनिवर्सिटियों से एडमिशन नहीं मिला, जिसकी वजह से ट्रम्प नाराज़ हैं और इन यूनिवर्सिटी को लेकर एक्शन मोड में हैं.

हाल ही में यह दावा किया गया कि बैरन को NYU के स्टर्न स्कूल ऑफ बिज़नेस में फाइनेंस पढ़ने का मौका इसलिए मिला क्योंकि उसे हार्वर्ड, कोलंबिया और स्टैनफोर्ड ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया. हालांकि इस पर पहली महिला मेलानिया ट्रम्प ने साफ किया कि बैरन ने हार्वर्ड में आवेदन ही नहीं किया था. उनके संचार निदेशक निकोलस क्लेमेंस ने कहा, 'बैरन ने हार्वर्ड में आवेदन नहीं किया और यह दावा पूरी तरह से झूठा है.'

बैरन ट्रम्प की पढ़ाई के बारे में

बता दें कि बैरन ट्रम्प ने हाल ही में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई शुरू की है और वह 2024 में वेस्ट पाम बीच, फ्लोरिडा के ऑक्सब्रिज अकादमी से स्नातक हुए थे. डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैरन को तकनीक में काफी रुचि है और वह काफी प्रतिभाशाली छात्र है. उन्होंने यह भी कहा कि बैरन को राजनीति में भी थोड़ी दिलचस्पी है.

ट्रम्प ने दिया सोशल मीडिया वेटिंग आदेश

इस पूरे विवाद के बीच, ट्रम्प प्रशासन ने दुनियाभर में अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिया है कि वे स्टूडेंट और एक्सचेंज वीज़ा के लिए नई अपॉइंटमेंट लेना फिलहाल रोक दें. यह निर्णय सोशल मीडिया वेटिंग की नई गाइडलाइंस लागू करने से पहले लिया गया है.

सोशल मीडिया वेटिंग के तहत, छात्र वीज़ा के आवेदकों की ऑनलाइन गतिविधियों की गहन जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अमेरिका में पढ़ाई के योग्य हैं या नहीं. यह कदम फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के बाद लिया गया है, जिनमें कुछ अमेरिकी यूनिवर्सिटीज को ट्रम्प प्रशासन ने यहूदी विरोधी माहौल फैलाने का आरोप लगाया है.

अमेरिकी यूनिवर्सिटीज को लेकर ट्रम्प की सख्ती 

इसमें ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय छात्रों का डेटा मांगा और जवाब न मिलने पर सख्त कदम उठाए. प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अन्य विश्वविद्यालयों में ट्रांसफर करने या अमेरिका छोड़ने की चेतावनी भी दी. यह फैसला फिलहाल कोर्ट के आदेश से स्थगित है.

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि हार्वर्ड में यहूदी छात्रों के लिए असुरक्षित माहौल है और वहां पर प्रो-हामास सोच को बढ़ावा मिल रहा है. इसके चलते विश्वविद्यालय की टैक्स-फ्री स्थिति खत्म करने की बात भी सामने आई है.

इस विवाद में अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि फिलिस्तीन का समर्थन करने पर छात्रों और ग्रीन कार्ड होल्डर्स को देश से निकाले जाने की चेतावनी दी गई है. आलोचकों का कहना है कि यह अमेरिका के संविधान में दिए गए फ्री स्पीच के अधिकार का उल्लंघन है.

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