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इजरायल-ईरान युद्ध से टेंशन में क्यों है चीन? ड्रैगन के सालों के मेहनत पर मंडराया संकट

Iran Israel conflict impact on China: ईरान और इज़राइल के बीच जारी तनाव ने चीन की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. चीन ईरान से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी जरूरतों का 15% हिस्सा पूरा करता है. यदि यह युद्ध बढ़ता है या होरमुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो चीन की तेल और गैस सप्लाई बाधित हो सकती है.

Iran Israel conflict impact on China: ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने चीन की नींद उड़ा दी है. दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश चीन अब इस चिंता में है कि कहीं उसके लिए पश्चिम एशिया से आने वाली सस्ती तेल सप्लाई पूरी तरह न रुक जाए.

चीन बीते कई सालों से ईरान के साथ मिलकर न केवल सस्ते तेल की खरीद कर रहा है बल्कि अपने रणनीतिक प्रभाव को भी इस क्षेत्र में बढ़ा रहा है. लेकिन इज़राइल के हालिया हमले ने चीन की इस रणनीति को बड़ा झटका दिया है.

कच्चे तेल पर चीन की निर्भरता

वर्तमान में चीन अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा ईरान और खाड़ी देशों से पूरा करता है. 2024 में चीन के कुल तेल आयात में 15% हिस्सा ईरान का था. चीन ने 2024 में औसतन 11.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा। लेकिन 2025 की शुरुआत से यह आंकड़ा लगातार गिर रहा है. अप्रैल 2025 तक चीन के द्वारा खरीदा गया ईरानी तेल घटकर 7.4 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुंच गया, जो पहले 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन था.

होरमुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहा खतरा

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इज़रायल हमले जारी रखता है तो वह होरमुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है. यही रास्ता चीन, जापान, भारत सहित कई देशों के लिए तेल का मुख्य मार्ग है. यहां से हर साल सैकड़ों अरब डॉलर का तेल और गैस निकलता है. यदि ये रास्ता बंद होता है तो चीन की तेल सप्लाई रुक सकती है और उसे महंगे दाम पर स्पॉट मार्केट से तेल खरीदना पड़ सकता है.

ईरान पर अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद चीन बना सबसे बड़ा खरीदार

2018 से अमेरिका ने ईरान पर भारी पाबंदियां लगा दी थीं. इसके बाद भी चीन ने ईरान से तेल खरीदना बंद नहीं किया. अमेरिका के दबाव के बावजूद बीजिंग ईरान के साथ ट्रेड करता रहा. चीन ने ईरान को न सिर्फ तेल खरीदा बल्कि मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी भी सप्लाई की. यही कारण है कि चीन ईरान को अपना टरणनीतिक कार्डट मानता है.

तेल के अलावा LNG सप्लाई भी खतरे में

2024 में चीन की कुल 25% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) आपूर्ति कतर और यूएई से हुई. अगर पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ता है तो इन देशों की LNG सप्लाई भी प्रभावित होगी. इससे चीन को महंगे दामों पर LNG खरीदनी पड़ सकती है.

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भाग रहा चीन

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते कुछ सालों में चीन की ऊर्जा नीति बदल दी है. चीन तेजी से सोलर, विंड एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ रहा है ताकि तेल और गैस पर निर्भरता कम हो सके. अब तक चीन की 56% पावर कैपेसिटी रिन्यूएबल स्रोतों से आ रही है, जो 10 साल पहले सिर्फ 33% थी. लेकिन पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने में चीन को अभी लंबा वक्त लगेगा.

कूटनीतिक संकट में फंसा चीन

चीन ने 2021 में ईरान के साथ 25 साल की साझेदारी का करार किया था. 2023 में ईरान को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में शामिल भी कराया. इसके अलावा चीन ने सऊदी-ईरान समझौते में भी बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन अब ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच चीन असहाय दिख रहा है. बीजिंग चाहकर भी इज़राइल या अमेरिका पर दबाव नहीं बना पा रहा.

ईरान कमजोर पड़ा तो चीन के लिए बड़ा नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में पूरी तरह कमजोर हो गया तो इससे सबसे बड़ा नुकसान चीन का होगा. इससे अमेरिका का प्रभाव इस क्षेत्र में और मजबूत होगा और चीन का वर्चस्व कम होगा. साथ ही, चीन के लिए तेल और LNG सप्लाई में संकट गहरा जाएगा.

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