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बांग्लादेश में एक और हिंदू की जिंदा जलाकर हत्या! पलाश कांती साहा की दर्दनाक मौत का वीडियो वायरल, अमित मालवीय का बड़ा दावा

बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले में पलाश कांती साहा नाम के एक हिंदू नागरिक को घर में बंद कर जिंदा जला दिए जाने का दावा सामने आया है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इसे हिंदुओं के खिलाफ टारगेटेड हिंसा बताया और वीडियो को रोंगटे खड़े कर देने वाला कहा. लगातार हो रहे ऐसे हमलों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Bangladesh Hindu killing: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या के बाद अब एक और हिंदू नागरिक को बेरहमी से मार दिए जाने की खबर सामने आई है. इस ताजा घटना ने न सिर्फ बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है.

पिरोजपुर जिले में हिंदू नागरिक की जिंदा जलाकर हत्या

बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दावा किया है कि बांग्लादेश के पिरोजपुर जिले में पलाश कांती साहा नामक एक हिंदू नागरिक की बेहद निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई. चश्मदीदों के मुताबिक, दंगाइयों ने पहले पलाश कांती साहा को उनके ही घर में बंद कर दिया और फिर बाहर से घर में आग लगा दी.

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो बेहद डरावना और झकझोर देने वाला बताया जा रहा है. वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक घर आग की लपटों में घिरा हुआ है, जबकि बाहर खड़े लोग रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं. यह दृश्य इलाके में फैली दहशत और बेबसी को बयां करता है.

27 दिसंबर की सुबह हुई वारदात

अमित मालवीय ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 27 दिसंबर को सुबह करीब 6 बजे पिरोजपुर जिले के दुमुरिया गांव में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के घरों को निशाना बनाते हुए आगजनी की. चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने खास तौर पर पलाश कांती साहा को उनके घर के अंदर बंद किया और फिर जानबूझकर आग लगा दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना से ठीक एक दिन पहले, यानी पिरोजपुर सदर जिले के पश्चिम दुमुरीतला गांव में भी दो हिंदू परिवारों के पांच घरों को आग के हवाले कर दिया गया था. इन लगातार घटनाओं से साफ है कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और टारगेटेड हिंसा का हिस्सा है.

मालदा-मुर्शिदाबाद दंगों से की तुलना

अमित मालवीय ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की तुलना भारत के पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद में हुए सांप्रदायिक दंगों से की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह वहां ममता बनर्जी के शासनकाल में हिंदू घरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया था, उसी तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर लक्षित हमले किए जा रहे हैं.

उन्होंने याद दिलाया कि उन दंगों के दौरान पिता-पुत्र हरगोबिंद दास और चंदन दास को इस्लामी कट्टरपंथियों ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था.

चुप्पी पर उठे सवाल

अमित मालवीय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिस तरह उस समय हिंदुओं की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया गया था, उसी तरह आज उनकी चुप्पी और निष्क्रियता सरहद पार मौजूद चरमपंथियों को और ज्यादा बेखौफ बना रही है.

उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि जब किसी समुदाय को सिर्फ उसके धर्म की वजह से निशाना बनाया जा रहा हो, तो दुनिया आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तरह की घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.

बढ़ती हिंसा ने बढ़ाई चिंता

बांग्लादेश में लगातार हो रही हिंदुओं की हत्याएं और उनके घरों को जलाए जाने की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा वहां एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. पलाश कांती साहा की हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित हैं और क्या इन घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी या नहीं.

फिलहाल, इस घटना को लेकर माहौल बेहद तनावपूर्ण है और पीड़ित परिवारों में डर और असुरक्षा का भाव साफ नजर आ रहा है.

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