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Temples: भारत के 5 सबसे सिद्ध मंदिर, जहां दर्शन के लिए पुरुषों पहनते पड़ते हैं धोती, दर्शन मात्र से जीवन होती है सफल

भारत में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिसमें लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करते हैं. इन मंदिरों के ड्रेस कोड निर्धारित किए गए हैं. अन्यथा यहां प्रवेश नहीं मिलती है. इन मंदिरों में दर्शन के लिए पारंपरिक परिधान का पहनना अनिवार्य माना जाता है.

India Famous Temples: सनातम धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन और शाश्वत धर्म माना जाता है. भारत के इतिहास में कई ऐसी देव घटनाएं हुई, जिसके बाद वहां मंदिर का निर्माण हुआ, क्योंकि वह जगह पवित्र माना गया. सनातन में भगवान की भक्ति और साधन को सबसे उपर का स्थान दिया गया है. ये भूमि साधु संत और ऋषि-मुनि ईश्वर की मानी जाती है, जहां पहले भी तप किया जाता रहा है और आज भी साधना में ऋषि-मुनि लीन हैं. 

प्रवेश के लिए ड्रेस कोड है जरूरी

परम पिता परमेश्वर बड़े ही दयालु एवं कृपालु महज भक्ति भाव से प्रसन्न हो जाते हैं. उनकी कृपा से साधक के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं और समस्त पापों से मुक्ति पाने के लिए तीर्थयात्रा भी करते हैं. भारत में कई प्रमुख तीर्थस्थल हैं. इनमें केदारनाथ, बद्रीनाथ, महाकाल, तिरुपति बालाजी, कामाख्या मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर,  सोमनाथ मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, इस्कॉन, काली मंदिर आदि प्रमुख हैं। इनमें 5 ऐसे मंदिर हैं, जहां देव दर्शन के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहननी पड़ती है.

महाकाल मंदिर (Mahakal Temple)

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना के लिए जाना जाता है. शिवरात्रि के शुभ अवसर पर यहां उत्सव और मेले का आयोजन किया जाता है. मंदिर में की जाने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है. इस अवसर पर श्रद्धालु शिवलिंग रूप में महादेव के दर्शन करते हैं. इसमें पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है. साधक महादेव के दर्शन के लिए ड्रेस कोड को फॉलो करते हैं. 

तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji)

आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर जगत के पालनहार भगवान विष्णु  वेंकटेश्वर का मंदिर है. माना जाता है कि प्रभु वेंकटेश्वर कलयुग में मानव समाज के कल्याण और उत्थान के लिए प्रकट हुए हैं. यह मंदिर 15 सौ साल पुराना है. ये एक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है.  इस मंदिर में भी देव दर्शन के लिए पारंपरिक ड्रेस कोड अनिवार्य है, इसके बिना  प्रवेश की अनुमति नहीं है.

महाबलेश्वर मंदिर (Mahabaleshwar Temple)

महाबलेश्वर मंदिर देवों के देव महादेव का भव्य मंदिर है. यह मंदिर महाराष्ट्र के सतारा जिले में है. धार्मिक मान्यता है कि महाबलेश्वर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है. आसान शब्दों में कहें तो शिवलिंग स्वयं ही उत्पन्न हुआ है. मंदिर के गर्भगृह में उपस्थित शिवलिंग को महालिंगम कहा जाता है.  देव दर्शन के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य है. मंदिर सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन-पूजा के लिए खुला रहता है.

घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Mahadev Temple)

महाराष्ट्र के दौलताबाद से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित घृष्णेश्वर मंदिर भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर है. इस मंदिर में भी भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में एक ज्योतिर्लिंग है. यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है. घृष्णेश्वर मंदिर का निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था. घृष्णेश्वर स्थित ज्योतिर्लिंग के बारे में कहा जाता है कि इस स्थान पर सुधर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था, जिनकी कोई संतान नहीं थी. ब्राह्मण दंपति भगवान शिव के भक्त थे. रोजाना शिव जी की पूजा करते थे. उनकी कृपा से घुश्मा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. इस मंदिर में भी ड्रेस कोड अनिवार्य है. पुरुषों को देव दर्शन के लिए धोती पहनना अनिवार्य है. 

पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple)

पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में स्थित है. यह मंदिर जगत के पालनहार भगवान विष्णु का भव्य मंदिर है. इस मंदिर का निर्माण राजा मार्तण्ड ने कराया है. मंदिर परिसर में ही 'पद्मतीर्थ कुलम' सरोवर है. इस मंदिर में देव दर्शन के लिए ड्रेस कोड निर्धारित है. पद्मनाभस्वामी मंदिर में देव दर्शन के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहननी पड़ती है. मंदिर में देव दर्शन के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य है. 

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