'चाहे वारिस पठान हों या पाकिस्तान में बैठे उनके नेता...', AIMIM नेता ने ऐसा क्या कहा कि भड़क उठे BJP के नितेश राणे
BMC चुनाव से पहले AIMIM नेता वारिस पठान के “मुस्लिम मेयर” बयान ने मुंबई की राजनीति में बवाल मचा दिया है. बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने पलटवार करते हुए कहा कि मुंबई में हिंदुत्ववादी विचारधारा का ही मेयर बनेगा. जनवरी 2026 में होने वाले बीएमसी चुनाव से पहले यह बयानबाज़ी सियासी गर्मी और बढ़ा सकती है.
BMC Election 2026: मुंबई में होने वाले बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है. इसी बीच AIMIM नेता वारिस पठान के एक बयान ने मुंबई की राजनीति में हलचल मचा दी है. वारिस पठान के 'मुंबई में मुस्लिम मेयर' वाले बयान पर अब महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे ने जोरदार पलटवार किया है. उनके बयान के बाद यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है.
नितेश राणे ने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई में हिंदुत्ववादी विचारधारा का ही मेयर बनेगा. उन्होंने वारिस पठान पर निशाना साधते हुए कहा कि वे शायद यह भूल गए हैं कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और यहां शरिया कानून नहीं चलता. नितेश राणे के मुताबिक, मुंबई के डीएनए में हिंदुत्व बसा हुआ है और यहां का नेतृत्व भी उसी विचारधारा से जुड़े व्यक्ति के हाथ में होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि देश में जिहादी मानसिकता फैलाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन चाहे वारिस पठान हों या 'पाकिस्तान में बैठे उनके नेता', बीजेपी ऐसी साजिशों को कभी सफल नहीं होने देगी.
वारिस पठान ने क्या कहा था?
दरअसल, यह पूरा विवाद AIMIM नेता वारिस पठान के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक दिन ऐसा आएगा जब मुंबई की मेयर हिजाब पहनने वाली महिला होगी. उन्होंने सवाल उठाया था कि मुंबई में मुस्लिम मेयर क्यों नहीं हो सकता. वारिस पठान ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान समानता की बात करता है, तो फिर खान, पठान, शेख, कुरैशी या अंसारी मेयर क्यों नहीं बन सकते. इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई और अलग-अलग दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं.
बीएमसी चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज
बीएमसी चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक दल पूरी तरह एक्टिव मोड में हैं. जानकारी के मुताबिक, बीएमसी चुनाव जनवरी 2026 में होने हैं। 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, नेताओं की बयानबाज़ी और जुबानी हमले और तेज होते जा रहे हैं. हर पार्टी अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश में एक-दूसरे पर तीखे वार कर रही है.
संजय राउत ने भी दी प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे गैरजरूरी मुद्दा बताते हुए कहा कि भारत में मुस्लिम समाज के लोग पहले भी राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे बड़े संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं. संजय राउत के मुताबिक, इस तरह के बयान देकर बेवजह माहौल को गर्म करना ठीक नहीं है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है.
कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव से पहले 'मुस्लिम मेयर' को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब सियासी लड़ाई का बड़ा हथियार बनता दिख रहा है. आने वाले दिनों में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, मुंबई की राजनीति में ऐसे बयानों और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला और तेज होने की पूरी संभावना है.










