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दिनेश शर्मा कौन हैं, जिनके न्यायपालिका पर टिप्पणी पर मचा घमासान? बीजेपी ने बयान से किया किनारा, विवादों ने नाता है पुराना

लखनऊ के पूर्व मेयर दिनेश शर्मा योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में यूपी के दो उपमुख्यमंत्रियों में से एक थे. यह पहली बार नहीं है जब उनकी टिप्पणियों ने विवाद खड़ा किया है. न्यायपालिका पर उनकी टिप्पणी के बाद बीजेपी ने उनके बयानों से किनारा कर लिया है.

Dinesh Sharma Judiciary Remarks: बीजेपी नेता दिनेश शर्मा के न्यायपालिका पर की गई टिप्पणी से सियासी उफान उठ गया. उनके बयान के बाद बीजेपी चीफ जेपी नड्डा ने उनका बयान से पार्टी को तुरंत किनारा कर लिया है. दिनेश शर्मा का बयान ऐसे समय में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति को विधेयक को मंजूरी देने में समय सीमा तय कर दी. 

दरअसल, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट पर दिए गए बयान पर बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, 'लोगों में यह आशंका है कि जब डॉ. बीआर अंबेडकर ने संविधान लिखा था तो उसमें विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार स्पष्ट रूप से लिखे गए थे. भारत के संविधान के अनुसार, कोई भी लोकसभा और राज्यसभा को निर्देश नहीं दे सकता है और राष्ट्रपति पहले ही इस पर अपनी सहमति दे चुके हैं. कोई भी राष्ट्रपति को चुनौती नहीं दे सकता क्योंकि राष्ट्रपति सुप्रीम हैं.'

कौन है बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा?

लखनऊ यूनिवर्सिटी में कॉमर्स के प्रोफेसर रहे दिनेश शर्मा की RSS में गहरी पैठ है और उन्हें एक मिलनसार नेता के रूप में देखा जाता है. उन्होंने आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ राजनीति में कदम रखा और इसके बाद लखनऊ महानगर अध्यक्ष के रूप में भी काम किया. 

बीजेपी में जमीनी स्तर पर वार्ड अध्यक्ष के रूप में शुरुआत करने के बाद वे पार्टी में आगे बढ़े और पार्टी की युवा शाखा, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया. उन्हें 1998 में उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया. 

लखनऊ से शुरू हुआ राजनीति का सफर

2004 में जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ा तो दिनेश शर्मा उनके चुनाव कार्यालय के संयोजक और चुनाव प्रबंधन समिति का हिस्सा थे. यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा को नई दिशा मिली.

मेयर बनते ही मिला बड़ा राजनीतिक ब्रेक

नवंबर 2006 में शर्मा को लखनऊ के मेयर पद पर जीत हासिल हुई. लखनऊ बीजेपी का परंपरागत गढ़ माना जाता है, जहां उच्च जातियों और शिया मुसलमानों का अच्छा समर्थन रहा है. 2012 में वे फिर से भारी मतों से मेयर चुने गए—इस बार 1.71 लाख वोटों के अंतर से.

बीजेपी संगठन में लगातार बढ़ता प्रभाव

दिनेश शर्मा का कद 2014 में और बढ़ा, जब उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया. इसी साल वे पार्टी के सदस्यता अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी बने, जिसने बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने में मदद की.

मोदी से नजदीकी: रामलीला में शामिल होने तक

2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शर्मा के निमंत्रण पर लखनऊ के ऐशबाग में रामलीला में शामिल हुए. इस घटना ने शर्मा की पार्टी नेतृत्व से नजदीकी को और उजागर किया.

डिप्टी सीएम बनकर पेश किया उदारवादी चेहरा

2017 में यूपी में भाजपा की सरकार बनने पर दिनेश शर्मा को योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया. इस कदम को पार्टी की ओर से उदार छवि प्रस्तुत करने की कोशिश माना गया, क्योंकि दिनेश शर्मा की छवि मुस्लिम समुदाय के साथ तालमेल बैठाने वाले नेता की रही है. 

2022 में ब्रजेश पाठक से बदली जगह, फिर भेजे गए राज्यसभा

2022 में दोबारा सत्ता में लौटने पर बीजेपी ने दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक को मंत्री बनाया. बाद में उन्हें सितंबर 2023 में राज्यसभा भेजा गया.

विवादों से भी रहा है नाता

यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने दिनेश शर्मा की किसी टिप्पणी से खुद को अलग किया हो. 2018 में उन्होंने सीता को टेस्ट-ट्यूब बेबी कह दिया था, जिसके बाद पार्टी को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी.

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