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दो से तीन चरणों में होगा बिहार विधानसभा चुनाव, दिवाली और छठ के बीच सर्दी में बढ़ेगा राज्य का सियासी पारा

Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 दो से तीन चरणों में हो सकते हैं। चुनाव आयोग दिवाली और छठ जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए मतदान की तारीख तय करेगा. ECINET ऐप से चुनाव प्रबंधन को डिजिटल किया जा रहा है, मतदाता सूची में सुधार, पहली बार वोट देने वालों के लिए विशेष अभियान और AI आधारित प्रचार सामग्री की निगरानी जैसी नई पहलें की जा रही हैं. चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरमाता जा रहा है.

Bihar Assembly Election 2025: बिहार की सियासत एक बार फिर गर्म हो चुकी है और इसकी वजह है – बिहार विधानसभा चुनाव 2025. सभी चुनावी पार्टी भी इसे लेकर मैदान में उतरना शुरू कर चुकी है... बयानबाजी का सीलसीला भी शुरू हो चुका है. जहां बिहार विजय से बीजेपी यानी कि NDA वापसी करना चाहती है तो RJD यानी कि महागठबंधन वापसी की तैयारी में जुटी है. 

India Today की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार चुनाव दो से तीन चरणों में कराए जा सकते हैं और दीवाली व छठ जैसे प्रमुख त्योहारों को ध्यान में रखते हुए इसकी तारीखें तय होंगी. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है, लिहाज़ा इससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करनी अनिवार्य है.

चुनावी बिसात बिछनी शुरू

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इसी महीने बिहार दौरे पर आ सकते हैं ताकि चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर सकें. इसके साथ ही Booth Level Officers (BLOs) को ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि मतदाता सूची में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो. यह वही मुद्दा है जिस पर महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में चुनाव आयोग को आलोचना झेलनी पड़ी थी.

चुनाव आयोग का दावा है कि जनवरी 2025 में फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद बिहार, हरियाणा और दिल्ली में किसी ने अपील तक नहीं की, जो पारदर्शिता की तरफ इशारा करता है.

एक ऐप से चलेगा पूरा चुनाव: ECINET

इस बार चुनाव आयोग एक बड़ा डिजिटल परिवर्तन लाने जा रहा है. अब तक जहां 40 अलग-अलग ऐप और वेबसाइट्स की मदद से चुनावी संचालन किया जाता था, वहीं अब एक ही 'ECINET' नामक इंटीग्रेटेड डिजिटल डैशबोर्ड से पूरा चुनाव प्रबंधन किया जाएगा. यह ऐप पूरी तरह बिहार चुनाव से पहले लाइव हो जाएगा.

मतदाता सूची में होगी सफाई:

  • डुप्लिकेट EPIC (मतदाता पहचान पत्र) नंबरों को हटाया जा चुका है.
  • मतदाता सूची को अब रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के मृत्यु रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा, ताकि मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें.
  • पहली बार वोट देने वाले 18+ युवाओं के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.
  • BLOs को ID कार्ड दिए जाएंगे ताकि वे घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन कर सकें.

मतदाता सुविधा में बड़ा सुधार:

  • इस बार चुनाव आयोग मतदाताओं की सुविधा को प्राथमिकता दे रहा है:
  • प्रत्येक बूथ पर मतदाताओं की संख्या 1,500 से घटाकर 1,200 की जाएगी.
  • घनी आबादी वाले इलाकों में अतिरिक्त बूथ बनाए जाएंगे.
  • कोई भी मतदाता 2 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय न करे, इसका खास ध्यान रखा जाएगा.
  • ऊंची इमारतों में भी मतदान केंद्र बनाए जाएंगे.
  • मोबाइल जमा करने की सुविधा मतदान केंद्रों के बाहर दी जाएगी.
  • मतदाता पर्ची पर स्पष्ट पार्ट और सीरियल नंबर छापे जाएंगे.

AI की भी रखी जाएगी निगरानी:

चुनाव आयोग इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़रिए फैलने वाले भ्रामक कंटेंट को भी रोकने के लिए तैयार है:

एक विशेष सेल गठित किया जाएगा जो AI आधारित प्रचार सामग्री पर निगरानी रखेगा.

राजनीतिक दलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे AI से तैयार किसी भी सामग्री पर स्पष्ट रूप से 'AI-जेनरेटेड' टैग लगाएं, ताकि मतदाता भ्रमित न हों.

चुनावी रंगमंच सजने को तैयार

बिहार की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है – यहां जातिगत समीकरण, महागठबंधन बनाम NDA, और स्थानीय मुद्दे हर चुनाव को एक राजनीतिक महायुद्ध में बदल देते हैं. इस बार भी राम मंदिर और हिंदुत्व कार्ड पर चर्चा होगी. बेरोजगारी और पलायन पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है. प्रधानमंत्री मोदी बनाम नीतीश कुमार की सियासी दूरी और समीकरण भी इस चुनाव पर बड़ा असर डाल सकता है और पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाता जो चुनाव का रुख बदल सकते हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र का एक पर्व बनने वाला है, जिसमें न केवल राजनीतिक दलों की रणनीतियां टकराएंगी, बल्कि तकनीक, पारदर्शिता और मतदाता सुविधा का नया स्तर भी दिखेगा. जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, राजनीतिक हलचल, घोषणापत्रों की बौछार और रैलियों की गूंज बिहार की फिजा में घुलने लगेगी.

पिछली बार कैसे हुआ था मतदान?

अगर पिछले चुनावों पर नज़र डालें, तो 2020 में तीन चरणों में मतदान हुआ था:

पहला चरण: 28 अक्टूबर (71 सीटें)

दूसरा चरण: 3 नवंबर (94 सीटें)

तीसरा चरण: 7 नवंबर (78 सीटें)

परिणाम: 10 नवंबर को घोषित किए गए

वहीं 2015 के चुनाव पांच चरणों में हुए थे. इससे साफ है कि बिहार में बहु-चरणीय मतदान की परंपरा रही है, जो इस बार भी जारी रह सकती है.

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