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बिहार की सबसे बड़ी पार्टी से लेकर करारी शिकस्त तक... RJD 20 साल बाद कैसे पहुंची सबसे बुरे दौर में?

तेजस्वी यादव की आरजेडी बिहार चुनाव में बड़े झटके का सामना कर रही है और शुरुआती रुझानों में पार्टी 32 सीटों पर सिमटती दिख रही है. एनडीए 191 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे एक बार फिर सत्ता वापसी लगभग तय लग रही है. वोट शेयर में सबसे आगे होने के बावजूद आरजेडी करीबी मुकाबलों को जीत में बदलने में नाकाम दिख रही है.

Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती शुरू हुए साढ़े चार घंटे हो चुके हैं, और शुरुआती रुझान विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी RJD के लिए बिल्कुल भी अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं.
 
तेजस्वी यादव की अगुवाई वाली पार्टी, जिसने इस बार 143 सीटों पर चुनाव लड़ा था, सिर्फ 32 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. अगर रुझान ऐसे ही बने रहे, तो यह RJD के लिए एक बड़ी चुनावी हार होगी और पार्टी के इतिहास में सबसे खराब प्रदर्शन की ओर इशारा करेगी.

RJD के चुनावी इतिहास में दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन!

2020 में RJD राज्य की सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बनी थी। लेकिन 2025 में तस्वीर बिल्कुल उलटती दिख रही है. अगर परिणाम मौजूदा रुझानों के अनुसार रहे, तो यह RJD का दूसरा सबसे खराब चुनावी प्रदर्शन होगा.

2005 में जब नीतीश कुमार पहली बार NDA की बड़ी जीत के साथ सत्ता में आए तो RJD को सिर्फ 55 सीटें मिली थीं. उस समय राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं और राज्य में जबरदस्त एंटी-इंकम्बेंसी थी.

2010 के चुनाव RJD के लिए इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट लेकर आए, जब पार्टी केवल 22 सीटों पर सिमट गई थी.

अब 2025 में, तेजस्वी यादव की RJD का प्रदर्शन 2010 की गिरावट के करीब जाता दिख रहा है.

20 साल बाद फिर NDA की वापसी—JDU और BJP का सुपर शो

बीते दो दशकों में नीतीश कुमार कई बार पाला बदल चुके हैं, लेकिन इस चुनाव में वे एक बार फिर BJP के साथ NDA में मजबूती से खड़े हैं. 12:30 बजे तक NDA गठबंधन 243 में से 191 सीटों पर आगे चल रहा है जो एक प्रचंड बहुमत का संकेत है.

इसका मतलब साफ है कि बिहार की सत्ता एक बार फिर NDA के पक्ष में जाती दिख रही है और तेजस्वी यादव के लिए यह चुनाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है.

तेजस्वी यादव के लिए झटका: पार्टी की विरासत पर सवाल

36 वर्षीय तेजस्वी यादव अब RJD की कमान संभाल चुके हैं. उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने 1997 में RJD बनाई थी और उसे कई ऐतिहासिक जीत दिलाई थी.

लेकिन इस चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी वोट शेयर में सबसे आगे है, लेकिन सीटों में काफी पीछे रह गई है.

इसका मतलब यह है कि RJD ने कई जगहों पर बड़ी बढ़त से जीत जरूर दर्ज की है, लेकिन करीबी मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है, जिससे सीटें कम हो गईं.

क्या बदलेगी तस्वीर? अभी कई राउंड की गिनती बाकी

हालांकि अभी वोटों की गिनती के कई राउंड बाकी हैं. जैसे-जैसे बैलेटों और EVM की गिनती आगे बढ़ेगी, रुझान बदल भी सकते हैं.

लेकिन फिलहाल की तस्वीर यह साफ कह रही है कि RJD काफी पीछे है, NDA एक बड़ी जीत की ओर बढ़ रहा है और बिहार की राजनीति एक बार फिर नीतीश–मोदी फैक्टर से प्रभावित होती नजर आ रही है.

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