दुनिया हथियार बेचने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश भारत, जानिए सैन्य ताकत के लिए कितना करता है खर्च
SIPRI ईयरबुक 2026 के अनुसार भारत 2025 में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश और दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना रहा. भारत का रक्षा खर्च बढ़कर 92.1 अरब डॉलर (करीब 7.9 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 8.9% अधिक है.
India Military Spending: भारत वर्ष 2025 में भी दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना रहा. साथ ही, वह बड़े हथियारों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक भी रहा। यह जानकारी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है.
सोमवार को जारी SIPRI ईयरबुक 2026 के अनुसार, 2025 में भारत का सैन्य खर्च बढ़कर 92.1 अरब डॉलर (करीब 7.9 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है.
रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा खर्च के मामले में भारत केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी से पीछे है.
यह आकलन ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने हाल ही में केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 85 अरब डॉलर (करीब 7.3 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड आवंटन किया था.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बढ़ोतरी को अभूतपूर्व बताया था. उन्होंने कहा था कि लड़ाकू विमान, ड्रोन, पनडुब्बियां, युद्धपोत और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए अतिरिक्त धनराशि आवश्यक है, ताकि सशस्त्र बलों को और मजबूत बनाया जा सके.
SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देने के बावजूद भारत दुनिया के प्रमुख हथियार आयातकों में शामिल बना हुआ है.
वर्ष 2021-25 की अवधि के दौरान भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा और वैश्विक हथियार आयात में उसकी हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही.
इसके मुकाबले पाकिस्तान पांचवें स्थान पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 4.2 प्रतिशत थी. यानी पांच वर्षों के दौरान भारत का हथियार आयात पाकिस्तान की तुलना में लगभग दोगुना रहा.
ये आंकड़े दिखाते हैं कि अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए भारत अभी भी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर काफी हद तक निर्भर है.
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने लड़ाकू विमानों, मिसाइल रक्षा प्रणालियों, नौसैनिक संसाधनों, निगरानी तकनीकों और मानव रहित सैन्य प्लेटफॉर्मों की खरीद पर विशेष ध्यान दिया है. इसका उद्देश्य सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की परिचालन क्षमता को मजबूत करना है.
बदल रहा है युद्ध का स्वरूप
SIPRI के अनुसार दक्षिण एशिया में सैन्य प्रतिस्पर्धा अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें, सशस्त्र ड्रोन, साइबर युद्ध तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सैन्य प्रणालियां क्षेत्र की रणनीतिक तस्वीर को तेजी से बदल रही हैं.
संस्थान ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया है. SIPRI ने इसे दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट बताया है.
रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्रीय संघर्ष की प्रकृति में बड़ा बदलाव था, क्योंकि पहली बार दोनों देशों ने किसी सक्रिय सैन्य संघर्ष के दौरान साइबर ऑपरेशंस का इस्तेमाल किया.
दुनिया भर में बढ़ रहा सैन्यीकरण
स्टॉकहोम स्थित थिंक टैंक ने चेतावनी दी है कि वैश्विक सुरक्षा माहौल तेजी से सैन्यीकरण की ओर बढ़ रहा है.
दुनिया भर की सरकारें अपने रक्षा बजट बढ़ा रही हैं और आधुनिक हथियार तकनीकों में भारी निवेश कर रही हैं.
SIPRI के निदेशक करीम हग्गाग के अनुसार, बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज तकनीकी विकास अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को बदल रहे हैं और वैश्विक अस्थिरता को बढ़ा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से उन्नत देशों के बीच युद्धों की वापसी और अमेरिका के अपने सहयोगी देशों के साथ कमजोर होते संबंध आज वैश्विक सुरक्षा पर सबसे अधिक प्रभाव डाल रहे हैं.
करीम हग्गाग ने चेतावनी दी कि सैन्य शक्ति और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर बढ़ती निर्भरता वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकती है तथा दीर्घकालिक स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती है.
हथियार आयात के साथ निर्यात पर भी फोकस
दूसरी ओर भारत बड़े हथियार आयातक होने के साथ-साथ रक्षा निर्यातक बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.
अप्रैल में सरकार ने घोषणा की थी कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर (करीब 34,000 करोड़ रुपये) के आंकड़े को पार कर गया है.
यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है.
राजनाथ सिंह ने उस समय कहा था कि भारत वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने इस वृद्धि को भारतीय रक्षा उत्पादों और स्वदेशी तकनीक पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत बताया था.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब 100 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया जैसे देश भी शामिल हैं.
भारत के रक्षा निर्यात में मिसाइलें, तोप प्रणाली, गश्ती पोत, रडार सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक रक्षा उपकरण शामिल हैं.
दोहरी रणनीति पर आगे बढ़ रहा भारत
SIPRI की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि भारत रक्षा क्षेत्र में दोहरी रणनीति अपना रहा है.
एक तरफ वह अपनी सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों से आधुनिक हथियार और सैन्य प्रणालियां खरीद रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात को मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है.
बढ़ते रक्षा खर्च, सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा उत्पादन के विस्तार के साथ भारत तेजी से एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में उभर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं.
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