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देश के सबसे बड़े एग्जाम स्कैम! 2002 से 2025 तक 45 बड़े पेपर लीक, जानिए किसके शासन काल में कितने मामले और कितनी कार्रवाई

2002 से 2025 के बीच देश में सामने आए 45 बड़े पेपर लीक मामलों की जांच में यह सामने आया कि परीक्षा एजेंसियों और भर्ती संस्थाओं के शीर्ष पदों पर बैठे बहुत कम अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई. कुछ अधिकारियों को पद से हटाया गया, कुछ को निलंबित या गिरफ्तार किया गया, जबकि कई मामलों में जांच और मुकदमे अब भी जारी हैं. 2024 के UGC-NET, UPPSC और यूपी पुलिस भर्ती से लेकर 2010 रेलवे भर्ती घोटाले तक कई बड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोशिश हुई, लेकिन केवल एक मामले में अदालत से सजा हुई.

Paper Leak Cases India: देश में 2002 से 2025 के बीच हुए 45 बड़े पेपर लीक मामले हुए, जिनमें जांच हुई तो परीक्षा संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे बहुत कम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई या उन्हें पद से हटाया गया. हालांकि, इनमें केवल एक मामले में अदालत से सजा भी हुई. हालिया पेपर लीक की बात करें तो NEET 2026 के पेपर लीक का मुद्दा गरमाया हुआ है. अब तक मामले में कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी है और आगे की जांच जारी है. आइए यहां जानते हैं कि पिछले 24 सालों में पेपर लीक के कौन-कौन से मामले हुए और किस सरकार में हुए. सबसे खास बात जब पेपर लीक हुआ तब कौन सी सरकार थी. 

प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:

2024 UGC-NET:

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक (डी-जी) सुभोध कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया था और लगभग चार महीने तक अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया. इसके बाद उन्हें इस्पात मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया और फिर उनके मूल छत्तीसगढ़ कैडर में वापस भेज दिया गया. सुभोध कुमार सिंह ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया. ये मामला बीजेपी के शासन काल में सामने आया. 

2024 UPPSC:

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी को समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) प्रारंभिक परीक्षा के संचालन में लापरवाही के आरोपों के बीच हटा दिया गया. जुलाई 2024 में पुलिस ने 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामले की जांच शुरू की. जून से सितंबर 2024 के बीच गिरफ्तार 12 आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. मामला प्रयागराज की अदालत में लंबित है। तिवारी ने टिप्पणी करने से इनकार किया. ये मामला बीजेपी के शासन काल में सामने आया. जहां राज्य में योगी की सरकार है.

2024 यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती:

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष और 1990 बैच की डीजीपी रैंक की आईपीएस अधिकारी रेनुका मिश्रा को पद से हटा दिया गया और कुछ समय के लिए अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया. वर्तमान में वह यूपी डीजीपी कार्यालय से संबद्ध हैं. मिश्रा ने कहा कि वह इस मामले पर बात नहीं करना चाहतीं. ये मामला बीजेपी के शासन काल में सामने आया.

2023 बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती:

पुलिस ने सेवानिवृत्त डीजी संजीव कुमार सिंघल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की थी. उन पर कथित लापरवाही का आरोप था। सेवानिवृत्ति के बाद वह केंद्रीय कांस्टेबल चयन बोर्ड के प्रमुख रहे थे. हालांकि अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. सिंघल ने कहा कि वह "उचित समय पर" इस बारे में बात करेंगे. ये मामला बीजेपी के शासन काल में सामने आया.

2022 RPSC:

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य बाबूलाल कटारा को वरिष्ठ अध्यापक भर्ती से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. जनवरी 2024 में उन्हें निलंबित कर दिया गया. ईडी ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की है. कटारा फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और मुकदमे की सुनवाई जारी है. ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. हालांकि, राज्य में कांग्रेस का शासन था. 

2021 REET लेवल-2:

तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) मामले में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के अध्यक्ष डी.पी. जारोली को पद से हटा दिया था. RBSE के सचिव अरविंद कुमार सेंगवा को निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में बहाल कर नवंबर 2022 में दोबारा नियुक्त किया गया. ईडी इस मामले की जांच कर रही है. जारोली ने कहा, 'मुझे राजनीतिक साजिश के तहत हटाया गया. सेंगवा के साथ भी अन्याय हुआ.' ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. हालांकि, राज्य में कांग्रेस का शासन था. 

2021 UKSSSC:

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के अध्यक्ष और आईएएस अधिकारी एस. राजू ने भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 5 अगस्त 2022 को इस्तीफा दे दिया. 1984 बैच के सेवानिवृत्त अधिकारी राजू सितंबर 2016 से आयोग के प्रमुख थे। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। राजू ने कहा कि इस्तीफा उनका व्यक्तिगत निर्णय था. उन्होंने बताया कि उन्होंने एसटीएफ को संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची दी थी, जिससे मामले का खुलासा करने में मदद मिली. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने नकल विरोधी कानून का मसौदा तैयार किया था, जिसे सरकार ने लागू किया. ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. राज्य में भी बीजेपी का शासन था. 

2021 UPTET:

उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकरण के सचिव संजय कुमार उपाध्याय के खिलाफ UPTET पेपर लीक मामले में मुकदमा दर्ज किया गया, उन्हें निलंबित किया गया और गिरफ्तार भी किया गया. बाद में उनका निलंबन रद्द कर दिया गया और उन्हें संयुक्त निदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया. पुलिस ने 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है और मुकदमा जारी है. उपाध्याय ने कहा, 'विभागीय जांच में मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ.' ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. राज्य में भी बीजेपी का शासन था.

2021 RPSC:

RPSC सदस्य रामूराम राइका को सब-इंस्पेक्टर भर्ती मामले में गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं. उन्होंने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया. ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. हालांकि, राज्य में कांग्रेस का शासन था. 

2018 यूपी शिक्षक भर्ती:

UPPSC की परीक्षा नियंत्रक अंजू लता कटियार को कथित लापरवाही के आरोप में बर्खास्त किया गया और गिरफ्तार किया गया. 2019 से अब तक इस मामले में सुनवाई के लिए कम से कम 202 बार तारीख लग चुकी है. बाद में कटियार को बहाल कर राज्य राजस्व बोर्ड में नियुक्त किया गया. उन्होंने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है तथा शीघ्र सुनवाई से सच्चाई सामने आएगी और न्याय मिलेगा. ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. राज्य में भी बीजेपी का शासन था.

2015 UPPSC:

अक्टूबर 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UPPSC अध्यक्ष अनिल यादव की नियुक्ति रद्द कर दी थी. यादव ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार करते हुए आरोपों को प्रचार बताया और कहा कि अदालत में कोई आरोप साबित नहीं हुआ है. ये मामला केंद्र में बीजेपी के शासन काल में सामने आया. हालांकि, राज्य में समाजवादी पार्टी का शासन था.

2013 RPSC:

तत्कालीन RPSC अध्यक्ष हबीब खान गौरन ने इस्तीफा दिया था. राजस्थान न्यायिक सेवा भर्ती मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्होंने आत्मसमर्पण किया और बाद में जमानत हासिल की. मामला अभी भी अदालत में लंबित है. गौरन ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और वह जमानत पर हैं. जब ये मामला हुआ तो केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर कांग्रेस की सरकार थी. 

2010 रेलवे भर्ती:

मुंबई रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के पूर्व अध्यक्ष सतेंद्र मोहन शर्मा और नौ अन्य लोगों को 30 जनवरी 2024 को हैदराबाद की सीबीआई अदालत ने सहायक लोको पायलट और सहायक स्टेशन मास्टर भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं का दोषी ठहराया. अदालत ने उन्हें पांच साल की सख्त कैद और जुर्माने की सजा सुनाई. 2 फरवरी 2024 को तेलंगाना हाईकोर्ट ने शर्मा को जमानत दे दी. उनसे टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका. ये कांग्रेस शासन काल का बड़ा पेपर लीक है. 

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