ईरान की दरियादिली! इन दोस्त देशों के जहाजों को Strait of Hormuz मिली एंट्री, क्या भारत भी है इसमें शामिल?
ईरान ने दावा किया है कि वह Hormuz Strait पर पूरा नियंत्रण रखता है और केवल दोस्त देशों के जहाजों को गुजरने दे रहा है. भारत समेत कई देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया गया है, जबकि अमेरिका और इज़राइल पर रोक है. इस फैसले से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.
Iran Hormuz Strait control: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Strait of Hormuz को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने दावा किया है कि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते पर मजबूत नियंत्रण बनाए हुए है और अब यह तय वही करेगा कि किन देशों के जहाज यहां से गुजरेंगे. इस बयान ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है.
पूरी खबर 10 आसान पॉइंट्स में
1. किन देशों को दी जा रही अनुमति
ईरान ने कहा है कि भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, इराक और बांग्लादेश जैसे देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है.
2. भारत के जहाज भी गुजर चुके
ईरानी मंत्री के मुताबिक, भारत के कम से कम दो जहाज हाल ही में इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर चुके हैं.
3. पहले से समन्वय जरूरी
ईरान ने साफ किया है कि जिन देशों को अनुमति मिल रही है, उन्होंने पहले से बातचीत और समन्वय किया है.
4. दोस्त देशों को प्राथमिकता
ईरान ने कहा कि जिन देशों से उसके अच्छे संबंध हैं या जिनके साथ समझ बनी है, उन्हें ही यह सुविधा दी जा रही है.
5. दुश्मन देशों पर सख्ती
अमेरिका, इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
6. युद्ध जैसी स्थिति का हवाला
ईरान ने साफ कहा कि क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति है, इसलिए दुश्मन देशों के जहाजों को जाने देना संभव नहीं है.
7. दुनिया के लिए अहम रास्ता
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में ऊर्जा सप्लाई होती है.
8. ईरान का बड़ा दावा
ईरान का कहना है कि उसने करीब 50 साल बाद इस जलमार्ग पर अपना मजबूत नियंत्रण दिखाया है.
9. पहले नहीं हुआ था विश्वास
ईरान ने बताया कि जब उसने आंशिक रोक की घोषणा की थी, तब कई देशों को लगा था कि यह सिर्फ धमकी है, लेकिन बाद में यह सच साबित हुआ.
10. विरोधी देशों की कोशिश नाकाम
ईरान के अनुसार, विरोधी देशों ने इस रास्ते को खोलने की कोशिश की, यहां तक कि दूसरे देशों से मदद भी मांगी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
ईरान का यह रुख साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में वैश्विक व्यापार, खासकर तेल और गैस की सप्लाई, राजनीतिक रिश्तों पर ज्यादा निर्भर हो सकती है. भारत जैसे देशों के लिए फिलहाल राहत की बात है कि उनके जहाजों को रास्ता मिल रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है.





.png)




.png)