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India-EU Free Trade Deal: 90% यूरोपीय सामानों पर टैक्स कम, कार, वाइन और चॉकलेट होंगी सस्ती, देखें पूरी लिस्ट

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 साल बाद फ्री ट्रेड डील पर मुहर लग गई है, जिससे 90% से ज्यादा यूरोपीय सामानों पर टैक्स घटेगा. इस समझौते से कार, वाइन, चॉकलेट, मशीनरी और मेडिकल प्रोडक्ट्स के दाम कम होने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 'मदर ऑफ ऑल ट्रेड्स' बताते हुए भारत-EU आर्थिक रिश्तों में ऐतिहासिक कदम करार दिया है.

India-EU Free Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच करीब 18 साल से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आखिरकार सहमति बन गई है. इस ऐतिहासिक समझौते के तहत यूरोपीय संघ के 90 प्रतिशत से ज्यादा सामानों के भारत में निर्यात पर आयात शुल्क (ड्यूटी) में कटौती की जाएगी. यूरोपीय संघ का दावा है कि इस डील से उसके सदस्य देशों को हर साल करीब 4 अरब यूरो (लगभग 36 हजार करोड़ रुपये) की ड्यूटी बचत होगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस व्यापार समझौते की पुष्टि करते हुए इसे भारत-EU आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा मील का पत्थर बताया. वहीं, यूरोपीय संघ की ओर से जारी फैक्ट शीट में कहा गया है कि इस डील के लागू होने के बाद EU का भारत को होने वाला निर्यात दोगुना तक बढ़ सकता है.

कौन-कौन से यूरोपीय प्रोडक्ट होंगे सस्ते?

इस फ्री ट्रेड डील के तहत भारत में आने वाले कई यूरोपीय उत्पादों पर शून्य या बेहद कम आयात शुल्क लगाया जाएगा. इनमें मशीनरी और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट, मेडिकल और सर्जिकल उपकरण, ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट्स, प्लास्टिक, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, आयरन-स्टील, मोटर व्हीकल्स और कीमती धातुओं से जुड़े उत्पाद शामिल हैं.

कारों पर लगने वाला आयात शुल्क, जो अभी 110 प्रतिशत तक है, उसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा. इसी तरह वाइन पर लगने वाला भारी-भरकम 150 प्रतिशत टैरिफ भी धीरे-धीरे घटाकर 20 प्रतिशत तक किया जाएगा. इससे यूरोपीय कारें और शराब भारतीय बाजार में पहले से कहीं ज्यादा सस्ती हो सकती हैं.

खाने-पीने की चीजों पर भी राहत

इस समझौते का असर रोजमर्रा की कई खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ेगा. फिलहाल पास्ता, ब्रेड, बिस्किट और चॉकलेट जैसे प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर लगभग 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है, जिसे इस डील के तहत पूरी तरह खत्म किया जाएगा.

जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेल, जिन पर अभी 45 प्रतिशत तक ड्यूटी है, उन्हें भी पूरी तरह शुल्क-मुक्त किया जाएगा. इसके अलावा फलों के जूस और नॉन-अल्कोहलिक बीयर पर भी जीरो ड्यूटी लागू होगी.

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

इस समझौते से भारतीय कंपनियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. यूरोप से आने वाली मशीनरी, हाई-एंड कंपोनेंट्स और केमिकल्स सस्ते होने से भारतीय उद्योगों की उत्पादन लागत घटेगी और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी.

इसके साथ ही, इस डील में सेवाओं और रेगुलेटरी सहयोग पर भी खास जोर दिया गया है. इससे भारतीय आईटी कंपनियों, प्रोफेशनल सर्विसेज और कुशल श्रमिकों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है.

हालांकि, भारत ने अपने घरेलू हितों की रक्षा के लिए कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर को इस डील में काफी हद तक सुरक्षित रखा है.

'मदर ऑफ ऑल ट्रेड्स' क्यों कहा गया यह समझौता?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात के दौरान इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल ट्रेड्स' करार दिया.

पीएम मोदी ने कहा कि यह डील भारत के 1.4 अरब लोगों और यूरोपीय संघ के करोड़ों नागरिकों के लिए नए अवसर खोलेगी. उन्होंने बताया कि यह समझौता दुनिया के करीब 25 प्रतिशत वैश्विक GDP और एक-तिहाई वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है.

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस डील से दो अरब लोगों का एक साझा फ्री ट्रेड ज़ोन तैयार हुआ है, जिससे दोनों पक्षों को बड़ा फायदा होगा.

कब लागू होगी भारत-EU फ्री ट्रेड डील?

फिलहाल इस समझौते को कानूनी जांच (लीगल वेटिंग) से गुजरना होगा, जिसमें करीब छह महीने का समय लग सकता है. इसके बाद इसे यूरोपीय संसद की मंजूरी भी लेनी होगी. सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील आने वाले वर्षों में भारत-EU व्यापारिक रिश्तों की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है.

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