न फोन और न इंटरनेट का इस्तेमाल! तो अजीत डोवाल कैसे करते हैं संवाद? NSA ने कर दिया बड़ा खुलासा
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने खुलासा किया है कि वह इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते और मोबाइल फोन भी बेहद सीमित उपयोग करते हैं. विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 में उन्होंने युवाओं को दूरदर्शी फैसले लेने और पहले कदम से पहले आगे की रणनीति सोचने की सलाह दी. डोभाल ने भारत को हर मोर्चे पर मजबूत बनाने और मजबूत नेतृत्व की अहमियत पर भी जोर दिया.
NSA Ajit Doval: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने शनिवार को एक ऐसा खुलासा किया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया. उन्होंने बताया कि वह न तो इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और न ही आमतौर पर मोबाइल फोन का. डोभाल यह बात विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के उद्घाटन सत्र के दौरान नई दिल्ली में कह रहे थे.
'मैं इंटरनेट इस्तेमाल नहीं करता'
अपने संबोधन में NSA अजित डोभाल ने साफ शब्दों में कहा, 'यह सच है कि मैं इंटरनेट का उपयोग नहीं करता. मोबाइल फोन भी बहुत कम इस्तेमाल करता हूं, सिर्फ पारिवारिक बातचीत या विदेशों में जरूरी संपर्क के लिए.'
उन्होंने बताया कि अपने काम को संभालने के लिए वह ऐसे संचार माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं, जिनके बारे में आम लोग जानते तक नहीं हैं। डोभाल ने कहा कि संवाद के और भी कई तरीके होते हैं, लेकिन कुछ अतिरिक्त व्यवस्थाएं ऐसी होती हैं, जिनसे लोग परिचित नहीं हैं.
2014 से देश की सुरक्षा की कमान संभाल रहे हैं डोभाल
गौरतलब है कि अजित डोभाल साल 2014 से भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर हैं. इससे पहले वह इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के डायरेक्टर भी रह चुके हैं और देश के सबसे अनुभवी खुफिया अधिकारियों में गिने जाते हैं. उन्हें कीर्ति चक्र पाने वाले सबसे कम उम्र के पुलिस अधिकारी होने का गौरव भी हासिल है.
'पहला कदम उठाने से पहले दो कदम आगे सोचो'
इस कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए अजित डोभाल ने कहा कि जीवन में सही समय पर सही और दूरदर्शी फैसला लेना बेहद जरूरी है. उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि कोई भी कदम उठाने से पहले यह जरूर सोचें कि उसके बाद के दो कदम क्या होंगे.
उन्होंने नए साल के संकल्पों का उदाहरण देते हुए कहा, '1 जनवरी को आप में से ज्यादातर लोगों ने संकल्प लिया होगा कि सोशल मीडिया पर समय बर्बाद नहीं करेंगे, जिम जाएंगे, मन लगाकर पढ़ाई करेंगे. कुछ लोग इसमें सफल होते हैं, कुछ नहीं. कुछ लोग सपने और फैसले के बीच भटक जाते हैं और कुछ सपने और उसके अमल के बीच.'
'भारत को हर मोर्चे पर मजबूत बनाना जरूरी'
अजित डोभाल ने अपने भाषण में भारत के इतिहास का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भारत को अपने अतीत के दर्दनाक अनुभवों को याद रखते हुए हर क्षेत्र में खुद को मजबूत बनाना होगा.
उन्होंने कहा, 'हम एक प्रगतिशील समाज थे. हमने कभी दूसरी सभ्यताओं या उनके मंदिरों पर हमला नहीं किया, लेकिन सुरक्षा के मामले में आत्म-जागरूक न होने की कीमत हमें चुकानी पड़ी. इतिहास ने हमें सबक सिखाया है.'
मजबूत नेतृत्व की जरूरत, PM मोदी का दिया उदाहरण
NSA डोभाल ने मजबूत नेतृत्व की अहमियत बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण दिया. उन्होंने नेपोलियन का प्रसिद्ध कथन दोहराते हुए कहा,
'मुझे हजार शेरों से नहीं, बल्कि हजार भेड़ों को नेतृत्व करने वाले एक शेर से डर लगता है। नेतृत्व कितना महत्वपूर्ण है, यह इससे समझा जा सकता है.'
'इतिहास भूलना देश के लिए होगा खतरनाक'
अपने संबोधन के अंत में डोभाल ने युवाओं से अपील की कि वे देश के इतिहास और उससे मिले सबक को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि
अगर युवा पीढ़ी इतिहास से मिले सबक को भूल गई, तो यह देश के लिए बेहद दुखद होगा.
NSA अजित डोभाल का यह बयान न सिर्फ उनकी सादगी और सुरक्षा को लेकर गंभीर सोच को दर्शाता है, बल्कि युवाओं को जीवन और देश दोनों के लिए जिम्मेदार फैसले लेने की मजबूत सीख भी देता है.
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