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भारत की सैन्य ताकत के आगे बांग्लादेश फिसड्डी, 'चिकन नेक' पर धमकी सिर्फ मुंह की बात, जानिए किसके कितना है दम

बांग्लादेश के नेता हसनात अब्दुल्ला ने भारत के नॉर्थ-ईस्टर्न राज्यों को निशाना बनाने की चेतावनी दी, जिसमें सिलिगुरी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' को कट ऑफ करने की बात कही गई. असम में बदलती जनसांख्यिकी और बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है. भारत ने पूर्वी सीमा की सुरक्षा मजबूत करते हुए नई गार्ड्स और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से किसी भी संकट से निपटने की तैयारी पूरी कर ली है.

India and Bangladesh: बांग्लादेश के नेशनल सिटीजन पार्टी के नेता हसनात अब्दुल्ला ने हाल ही में भारत के नॉर्थ-ईस्टर्न राज्यों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. उन्होंने भारत के सिलिगुरी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है, को कट ऑफ करने की बात कही और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में भारत की भूमिका को कमतर करार दिया. 

सिलिगुरी कॉरिडोर वह संकीर्ण भूमि मार्ग है जो भारत के मुख्य भौगोलिक क्षेत्र को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है. यह लंबे समय से भारत के लिए एक संवेदनशील भौगोलिक खतरा माना जाता रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विवादित 'ग्रेटर बांग्लादेश' नक्शे में दिखाया गया है कि बांग्लादेश भारत के नॉर्थ-ईस्ट को अलग कर सकता है.

सियासी अस्थिरता और बढ़ती जनसांख्यिकी चिंता

असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा ने राज्य में बदलती जनसांख्यिकी पर चिंता जताई है और दावा किया कि बांग्लादेश मूल के मुस्लिम निवासियों का हिस्सा जल्द ही 40 प्रतिशत तक पहुँच सकता है. बांग्लादेशी प्रवासी श्रमिक लगातार असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठ कर रहे हैं, जिसके पीछे मिलिटेंट समूहों और कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं का वोट बैंक कारण है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और पाकिस्तान की नजदीकी

2024 के अगस्त में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्लामवादी कट्टरपंथियों ने हटाया था और अमेरिका समर्थित मुहम्मद यूनुस को अस्थायी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया. अंतरिम सरकार ने पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करना शुरू किया, और पाकिस्तान के सैन्य व सरकारी अधिकारियों की उच्च स्तरीय यात्राएं हुईं.

भारत का संवेदनशील 'चिकन नेक' सिलिगुरी कॉरिडोर

भारत के लिए यह एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन चुकी है. लंबे समय तक पूर्वी सीमा को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने वाले पूर्व धारणाओं में अब दरारें नजर आ रही हैं. 'चिकन नेक' या सिलिगुरी कॉरिडोर इस सुरक्षा गणना में प्रमुख भूमिका निभाता है. 

सिलिगुरी कॉरिडोर लगभग 170 किलोमीटर लंबा और 60 किलोमीटर चौड़ा है, जिसमें सबसे संकीर्ण हिस्सा मात्र 20–22 किलोमीटर का है. यह भारत के आठ नॉर्थ-ईस्टर्न राज्यों के लिए एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग है और लगभग 50 मिलियन लोगों के लिए जीवनरेखा का काम करता है.

भारत ने इस संवेदनशील गलियारे की सुरक्षा और अवसंरचना पर कई कदम उठाए हैं. भारतमाला परियोजना के तहत हाईवे और रेलवे लाइनों का उन्नयन किया गया है, जिससे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ी और यात्रा समय घटा. इसके अतिरिक्त, हिली–महेंद्रगंज और कलादान मल्टीमॉडल कॉरिडोर जैसी वैकल्पिक कनेक्टिविटी योजनाएं भी प्रस्तावित हैं. सुरंगों और एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स के निर्माण पर विचार किया जा रहा है ताकि सुरक्षा बढ़े और बाहरी खतरों से बचाव हो सके.

सैन्य शक्ति और सुरक्षा

सैन्य दृष्टि से, सिलिगुरी कॉरिडोर भारत की सेना की सबसे मजबूत रक्षा रेखा मानी जाती है. यहां भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर (33 कोर) तैनात है, जो सिलीगुरी और सिक्किम की सुरक्षा संभालती है. इसके अलावा, आईटीबीपी, सीमा सुरक्षा बल (BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और राज्य पुलिस बल भी तैनात हैं. उत्तरी पूर्वी राज्यों में हाल ही में तीन नई सैन्य चौकियां धुब्री (असम), किशनगंज (बिहार) और चोप्रा (पश्चिम बंगाल) स्थापित की गई हैं, जो निगरानी, तत्परता और सीमा सुरक्षा को और मजबूत करती हैं.

हवाई क्षमताओं के मामले में भी भारत ने क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा दी है। हाशिमारा में राफेल स्क्वाड्रन तैनात है, एस-400 एंटी-एयर डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल रेजिमेंट के साथ हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित की गई है. इसके अलावा, भारत ने लगभग 4,100 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा का 80 प्रतिशत हिस्से को बाड़ लगा कर सुरक्षित किया है.

बांग्लादेश की 'चिकन नेक' कमजोरियां

बांग्लादेश की भी 'चिकन नेक' कमजोरियां हैं. उत्तरी बांग्लादेश का रंगपुर कॉरिडोर और दक्षिण-पूर्वी चटगांव कॉरिडोर संकीर्ण और संवेदनशील हैं. रंगपुर कॉरिडोर केवल 80 किलोमीटर में बांग्लादेश के 16,185 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अलग किया जा सकता है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का 10.9 प्रतिशत है. चटगांव कॉरिडोर मात्र 28 किलोमीटर चौड़ा है और 34,530 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कट ऑफ कर सकता है, जिससे बांग्लादेश का 80 प्रतिशत व्यापार बंद हो सकता है.

बांग्लादेश की सैन्य कमजोरियां

सैन्य और भौगोलिक दृष्टि से भारत की शक्ति बांग्लादेश की तुलना में बहुत अधिक है. भारतीय सेना के पूर्वी कमान में कुल 1.42 मिलियन सक्रिय जवान हैं, जबकि बांग्लादेश की सेना में 2,04,000 सैनिक हैं. भारतीय वायुसेना और नौसेना की क्षमताएं भी क्षेत्र में दबदबा बनाए रखती हैं.

चीन के साथ संबंध भारत के लिए चिंता का विषय

भारत चीन के बढ़ते प्रभाव और बांग्लादेश में उसकी सैन्य और राजनीतिक पहुंच को भी ध्यान में रखता है. बांग्लादेश के बढ़ते पाकिस्तान और चीन के साथ संबंध भारत के लिए चिंता का विषय हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षा और खुफिया तंत्र पूरी सतर्कता से स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. भारत का रुख अब भी परिपक्व और संयमित है, जिससे बांग्लादेश में नई सरकार के साथ शांतिपूर्ण और नियंत्रित संबंध बनाए रखे जा सकें.

भारत का सामरिक और कूटनीतिक संतुलन

सामरिक दृष्टि से, भारत ने नॉर्थ-ईस्ट को मजबूत किया है, सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ किया है और विभिन्न कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के माध्यम से किसी भी संभावित कट ऑफ या संकट से निपटने की तैयारी कर रखी है. बांग्लादेश के राजनीतिक अस्थिर होने और भारत विरोधी रुझानों के बावजूद, भारतीय सैन्य और कूटनीतिक रणनीति उसे स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने पर केंद्रित है.

बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता, भारत विरोधी रुझान और पाकिस्तान-चीन के प्रभाव ने नॉर्थ-ईस्ट की सुरक्षा की संवेदनशीलता बढ़ा दी है. इसके बावजूद, भारत ने अपनी सैन्य और कूटनीतिक रणनीति को मजबूत रखते हुए सिलिगुरी कॉरिडोर और पूरे पूर्वी सीमा क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कर दी है.

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