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चिनाब पर Dulhasti-II प्रोजेक्ट क्या है, जिसे लेकर पाकिस्तान का सूखने लगा गला? बढ़ेगी भारत की रौशनी

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर की चिनाब नदी पर दुलहस्ती-2 जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिसकी लागत 3,200 करोड़ रुपये से अधिक है. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जिससे पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. 260 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है.

Dulhasti-II Project: भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर की चिनाब नदी पर बनने वाले दुलहस्ती-2 (Dulhasti-II) जलविद्युत परियोजना को हरी झंडी दे दी है. इस फैसले के बाद पाकिस्तान की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. खास बात यह है कि यह मंजूरी ऐसे समय पर दी गई है, जब भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित कर दिया है.

केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत काम करने वाली हाइडल प्रोजेक्ट्स की एक्सपर्ट अप्रेज़ल कमेटी (EAC) ने दिसंबर में हुई अपनी 45वीं बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी. इसके बाद अब इस प्रोजेक्ट के लिए निर्माण से जुड़े टेंडर जारी करने का रास्ता साफ हो गया है.

करीब 3,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाले इस रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में विकसित किया जाएगा. सरकार का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगी.

पाकिस्तान की कड़ी आपत्ति

भारत के इस फैसले पर पाकिस्तान ने कड़ा ऐतराज जताया है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन कर रहा है और इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है. 

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की वरिष्ठ नेता और सीनेटर शेरी रहमान ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि पानी को हथियार बनाना न तो समझदारी है और न ही स्वीकार्य.

पाकिस्तान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच पहले से ही राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव बना हुआ है.

क्या है Dulhasti-II हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट?

दुलहस्ती स्टेज-2 परियोजना, पहले से चल रहे 390 मेगावाट के दुलहस्ती स्टेज-1 पावर प्रोजेक्ट का विस्तार है. दुलहस्ती स्टेज-1 को वर्ष 2007 में एनएचपीसी लिमिटेड (NHPC) द्वारा शुरू किया गया था और यह अब तक सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है.

नई योजना के तहत स्टेज-1 पावर स्टेशन से पानी को एक अलग सुरंग के जरिए स्टेज-2 तक ले जाया जाएगा. यह सुरंग करीब 3,685 मीटर लंबी और 8.5 मीटर व्यास की होगी, जिससे घोड़े की नाल के आकार का एक विशेष जलाशय तैयार किया जाएगा.

260 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता

दुलहस्ती-2 परियोजना में सर्ज शाफ्ट, प्रेशर शाफ्ट और एक भूमिगत पावरहाउस शामिल होगा, जिसमें 130-130 मेगावाट की दो यूनिट्स लगाई जाएंगी. इस तरह इस प्रोजेक्ट की कुल स्थापित क्षमता 260 मेगावाट होगी और इससे हर साल बड़ी मात्रा में बिजली उत्पादन किया जा सकेगा.

जमीन अधिग्रहण और स्थानीय प्रभाव

इस परियोजना के लिए कुल 60.3 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी। इसमें से 8.27 हेक्टेयर निजी भूमि किश्तवाड़ जिले के बेंज़वार और पलमार गांवों से ली जाएगी. स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास को लेकर प्रशासन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है.

सिंधु जल संधि पर क्या कहा EAC ने

पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेज़ल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह स्वीकार किया है कि चिनाब नदी का पानी भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 की सिंधु जल संधि के तहत साझा किया जाता रहा है. समिति ने यह भी कहा कि परियोजना के डिजाइन मानक पहले संधि के प्रावधानों के अनुरूप बनाए गए थे.

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ तौर पर दर्ज किया गया कि 23 अप्रैल 2025 से सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया है, जिसके बाद भारत इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है.

भारत-पाक रिश्तों में तनाव

दुलहस्ती-2 परियोजना को मिली मंजूरी को भारत की ऊर्जा रणनीति और जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. वहीं, पाकिस्तान इसे एक राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती के तौर पर देख रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा भारत-पाक संबंधों में एक नया तनाव बिंदु बन सकता है.

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