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India elections 2026: महाराष्ट्र से चुनावी आगाज, असम में BJP की अग्निपरीक्षा, जानिए साल 2026 में पूर्व से दक्षिण तक कहां-कहां सियासी महासंग्राम

2026 में होने वाले महाराष्ट्र, बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल के चुनाव भारत की राजनीति की दिशा तय करेंगे. बीजेपी मजबूत संगठन और लगातार जीत के दम पर आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष आपसी खींचतान से जूझ रहा है. ये सभी चुनाव मिलकर 2029 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल साबित हो सकते हैं.

India elections 2026: 2025 भारत की चुनावी राजनीति के लिहाज़ से बेहद हलचल भरा साल रहा. दिल्ली और बिहार के चुनावों के बीच अचानक हुए उपराष्ट्रपति चुनाव, तीनों में बीजेपी की जीत, वोटर फ्रॉड के आरोप, चुनावी सुधारों पर विवाद और मतदाता पुनः सत्यापन जैसे मुद्दों ने पूरे साल राजनीति को गरमाए रखा.

अब 2026 में भी हालात बदलते नहीं दिख रहे. महाराष्ट्र से लेकर बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल तक होने वाले चुनाव देश की राजनीति की दिशा तय करने वाले हैं.

महाराष्ट्र में BMC चुनाव से होगा सियासी आगाज़

नए साल का पहला बड़ा चुनाव 15 जनवरी को महाराष्ट्र में होने जा रहा है. इसमें देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) का चुनाव भी शामिल है, जिसका राजनीतिक और आर्थिक महत्व बेहद ज़्यादा है.

इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन आमने-सामने होगा महाविकास अघाड़ी (MVA) से, जिसमें कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना (उद्धव गुट) शामिल हैं.

हालांकि यह गठबंधन अब विचारधारा से ज़्यादा पारिवारिक रिश्तों और टूट-फूट से जूझता दिख रहा है.

मुंबई में ‘परिवार बनाम परिवार’ की राजनीति

इस बार मुंबई और पिंपरी-चिंचवड़ चुनाव की सबसे बड़ी कहानी है, परिवारों का फिर से मिलना.

मुंबई में 20 साल की दूरी के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक बार फिर साथ आते दिखेंगे. यह लड़ाई सिर्फ नगर निगम की नहीं, बल्कि बाल ठाकरे की विरासत को वापस पाने की भी है, जिसे 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना तोड़कर चुनौती दी थी.

दूसरी तरफ, एनसीपी में शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के बीच सुलह ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दिया है. 2023 में हुआ उनका विभाजन भी शिवसेना की तरह सत्ता समीकरण बदलने वाला साबित हुआ था.

कांग्रेस हाशिए पर, BJP मज़बूत स्थिति में

ठाकरे और पवार परिवारों की राजनीति के बीच कांग्रेस और भी पीछे धकेल दी गई है. पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह राज ठाकरे की MNS के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी, खासकर 2025 के ‘स्लैपगेटविवाद के बाद.

वहीं, बीजेपी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है. दिसंबर 2025 के पंचायत चुनावों में शानदार प्रदर्शन ने संकेत दे दिए हैं कि पार्टी अपना वोट बैंक इतना मजबूत कर चुकी है कि उसे सहयोगियों की ज़रूरत भी न पड़े.

अगर बीजेपी BMC जीतती है, तो यह अजित पवार और एकनाथ शिंदे दोनों के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर सकता है.

बंगाल में ममता बनर्जी की सबसे बड़ी परीक्षा

महाराष्ट्र के बाद सियासी फोकस जाएगा पश्चिम बंगाल पर, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अब तक की सबसे कठिन चुनौती का सामना करना है.

ममता बनर्जी 2019 से लगातार बीजेपी को रोकती आ रही हैं. 2021 में बीजेपी ने उनके करीबी रहे सुवेंदु अधिकारी को तोड़कर उन्हीं के खिलाफ नंदीग्राम से उतारा था.

इस बार ममता खुद को जनता के अधिकारों की रक्षक के रूप में पेश कर रही हैं और वक्फ कानून संशोधन, वोटर री-वेरिफिकेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेर रही हैं.

BJP बनाम ममता: राष्ट्र बनाम क्षेत्र की लड़ाई

बीजेपी ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार, सीमा सुरक्षा, वंशवाद और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हमला कर रही है.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ममता की यह रणनीति उन्हें न सिर्फ बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी मजबूत बनाती है.

यही वजह है कि अब ममता बनर्जी को 2029 में प्रधानमंत्री पद की संभावित दावेदार के रूप में भी देखा जाने लगा है.

असम में हिमंत बिस्वा सरमा का इम्तिहान

बंगाल के साथ-साथ असम में भी चुनावी माहौल गरम रहेगा. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी के सबसे आक्रामक और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं.

हालांकि यहां नागरिकता संशोधन कानून (CAA), जातीय संतुलन, आदिवासी राजनीति और ‘घुसपैठ’ जैसे मुद्दे चुनाव को अनिश्चित बना सकते हैं.

विपक्ष की चुनौती यह होगी कि वह स्थानीय अस्मिता और आर्थिक चिंताओं को एकजुट नैरेटिव में बदल सके.

तमिलनाडु

तमिलनाडु बीजेपी के लिए हमेशा से कठिन रहा है. राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमती है और बीजेपी अब तक यहां कभी बड़ी ताकत नहीं बन पाई.

इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी है फिल्म स्टार विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम.

विजय ने DMK को अपना राजनीतिक दुश्मन और बीजेपी को वैचारिक दुश्मन बताया है, जबकि AIADMK के प्रति नरम रुख अपनाया है.

DMK के खिलाफ AIADMK की लगातार हार पार्टी के भीतर संकट को और गहरा कर रही है.

केरल

केरल में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अगुवाई में वाम मोर्चा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहा है, जो राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व होगा.

लेकिन कांग्रेस नेतृत्व वाला UDF पूरी तरह आक्रामक है. 2025 के स्थानीय चुनावों में अच्छे प्रदर्शन और सरकार पर भ्रष्टाचार व यौन शोषण के आरोपों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. यहां प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की अहम रणनीतिकार होंगी.

BJP की हलचल, 2029 की तैयारी?

केरल और तमिलनाडु में भले ही बीजेपी कमजोर रही हो, लेकिन 2024 में अभिनेता सुरेश गोपी की जीत और तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर कब्जे ने पार्टी को उम्मीद दी है.

कुल मिलाकर, ये सभी चुनाव अलग-अलग राज्यों के ज़रूर हैं, लेकिन मिलकर 2029 के लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार कर रहे हैं.

बीजेपी के लिए यह मौका है मोदी युग के बाद की राजनीति पर सोचने का. वहीं कांग्रेस और INDIA गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, एकजुट रहना और भरोसेमंद विकल्प बनना.

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