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बांग्लादेश में चीन बना रहा ड्रोन, बॉर्डर के पास फैक्ट्रियां, कैसे बन रहा भारत की सुरक्षा के लिए खतरनाक?

बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर देश में ड्रोन बनाने का बड़ा रक्षा समझौता किया है, जिससे भारत की पूर्वी और पूर्वोत्तर सीमाओं के पास चीन की मौजूदगी बढ़ेगी. इस डील के तहत MALE और VTOL ड्रोन बनाए जाएंगे और चीन तकनीक भी ट्रांसफर करेगा. भारत इसे चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का हिस्सा मानकर सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है.

Bangladesh China Drone Deal: दक्षिण एशिया की सुरक्षा तस्वीर में एक बड़ा और अहम बदलाव सामने आया है. बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर देश में ड्रोन (UAV) बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे भारत की पूर्वी और पूर्वोत्तर सीमाओं के पास चीन की सैन्य मौजूदगी और प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस रक्षा समझौते को मंजूरी दे दी है और इसे सरकारी फंडिंग का भी समर्थन मिला है. यह समझौता सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्टनरशिप की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इसका मतलब साफ है अब चीन सिर्फ हथियार बेचने वाला नहीं रहेगा, बल्कि बांग्लादेश के भीतर ही सैन्य उत्पादन और तकनीक का हिस्सा बनेगा.

भारत की सीमाओं के पास चीन की तकनीकी मौजूदगी

हालांकि, बांग्लादेश सरकार इस परियोजना को आत्मनिर्भरता, आपदा प्रबंधन और सेना के आधुनिकीकरण से जोड़कर देख रही है, लेकिन भारत में इस कदम को लेकर गहरी चिंता है. वजह साफ है चीन की तकनीक और लंबी अवधि की ऑपरेशनल मौजूदगी भारत की सीमाओं के बेहद नजदीक स्थापित हो रही है.

भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञ इसे चीन की उस नीति का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें वह पड़ोसी देशों की सेनाओं के भीतर धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करता है  इन्फ्रास्ट्रक्चर, तकनीक ट्रांसफर और उत्पादन यूनिट के ज़रिए, न कि सिर्फ हथियार बेचकर.

27 जनवरी को हुआ समझौता

यह रक्षा समझौता 27 जनवरी को बांग्लादेश एयर फोर्स (BAF) और चीन की सरकारी डिफेंस कंपनी China Electronics Technology Group Corporation International (CETC) के बीच साइन हुआ. यह कार्यक्रम ढाका कैंटोनमेंट स्थित एयर फोर्स हेडक्वार्टर में हुआ, जिससे साफ है कि यह कोई निजी सौदा नहीं, बल्कि पूरी तरह संस्थागत और सरकारी स्तर का समझौता है.

बांग्लादेश के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि इस समझौते के तहत अत्याधुनिक ड्रोन बनाने और असेंबल करने की फैक्ट्री लगाई जाएगी. साथ ही चीन की ओर से तकनीक का ट्रांसफर और बांग्लादेश को लंबे समय में खुद ड्रोन बनाने लायक बनाने की योजना भी शामिल है.

चरणबद्ध तरीके से बनेगी ड्रोन क्षमता

समझौते के मुताबिक यह प्रोजेक्ट चरणों में लागू किया जाएगा. शुरुआती चरण में बांग्लादेश एयर फोर्स को MALE (Medium Altitude Low Endurance) ड्रोन और VTOL (Vertical Take-Off and Landing) ड्रोन बनाने और जोड़ने की क्षमता दी जाएगी.

इन ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ सैन्य कामों के लिए ही नहीं, बल्कि आपदा राहत, मानवीय सहायता और निगरानी जैसे नागरिक कामों के लिए भी किया जाएगा. बांग्लादेश सरकार बार-बार इस बात पर जोर दे रही है कि प्राकृतिक आपदाओं से जूझने वाले देश के लिए यह तकनीक बेहद जरूरी है.

समारोह में मौजूद रहे बड़े अधिकारी

इस समझौते के मौके पर बांग्लादेश और चीन के कई बड़े अधिकारी मौजूद थे. कार्यक्रम में एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान, बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन, बांग्लादेश सशस्त्र बल डिवीजन के प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल एस.एम. कमरुल हसन, और मुख्य सलाहकार कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे.

बोगरा एयरबेस में लगेगी फैक्ट्री

ड्रोन निर्माण सुविधा को बोगरा में प्रस्तावित एयरबेस पर स्थापित किया जाएगा, जिसे बांग्लादेश रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानता है. इस प्रोजेक्ट में सिर्फ फैक्ट्री ही नहीं, बल्कि एयरबेस से जुड़ा पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा.

इस योजना का आधिकारिक नाम है - 'Unmanned Aerial Vehicles (UAVs) के लिए निर्माण संयंत्र की स्थापना और तकनीक हस्तांतरण परियोजना.' इसे वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दी है और देश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने, जो फिलहाल रक्षा मंत्रालय भी देख रहे हैं, इसे हरी झंडी दी है. इसे लागू करने की जिम्मेदारी बांग्लादेश एयर फोर्स को दी गई है.

कितनी है इस प्रोजेक्ट की लागत

इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 608.07 करोड़ टका (लगभग 55 मिलियन डॉलर) तय की गई है. चीन के साथ बातचीत के बाद इसकी लागत पहले के प्रस्ताव से कम कर दी गई.

यह खर्च चार वित्तीय वर्षों में किया जाएगा. इसमें से 570.60 करोड़ टका ड्रोन निर्माण से जुड़ी तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखे गए हैं। बाकी रकम टैक्स, एलसी चार्ज और स्थानीय खर्चों में जाएगी.

खास बात यह है कि पूरा खर्च बांग्लादेश एयर फोर्स के मौजूदा बजट से ही किया जाएगा, सरकार की ओर से कोई अतिरिक्त फंड नहीं दिया जाएगा.

कौन-से ड्रोन बन सकते हैं?

हालांकि बांग्लादेश ने आधिकारिक तौर पर ड्रोन मॉडल का नाम नहीं बताया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां CETC का XY-I ड्रोन बनाया जा सकता है. यह एक MALE ड्रोन है, जिसे 2022 के Airshow China में दिखाया गया था और इसकी डिजाइन तुर्की के Bayraktar TB2 से मिलती-जुलती है.

XY-I ड्रोन निगरानी, टोही, बॉर्डर पेट्रोलिंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कम्युनिकेशन सपोर्ट और हमले जैसे कई काम कर सकता है. इसमें अलग-अलग तरह के सेंसर, कैमरे और हथियार लगाने की सुविधा बताई गई है.

चीन की रणनीति और भारत की चिंता

चीन पहले से ही बांग्लादेश का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है. बांग्लादेश की सेना में चीनी पनडुब्बियां, युद्धपोत, रडार और फाइटर जेट मौजूद हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश 20 J-10C फाइटर जेट खरीदने की भी तैयारी कर रहा है.

2019 से 2023 के बीच चीन के कुल हथियार निर्यात का करीब 11 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश को गया.

भारत की चिंता यह है कि भारत-बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा के पास लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन चीन को रणनीतिक बढ़त दे सकते हैं. साथ ही, चीन की तकनीक के ज़रिए क्षेत्र की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ सकती है.

विशेषज्ञ इसे चीन की उस नीति से जोड़ रहे हैं, जिसे'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' कहा जाता है यानी भारत के चारों ओर धीरे-धीरे रणनीतिक घेरेबंदी.

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