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AI के डर से डगमगाया भारतीय IT सेक्टर, एक हफ्ते में ₹4 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति साफ

एआई टूल्स के बढ़ते असर के डर से भारतीय आईटी शेयरों में 10 महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई. फरवरी में अब तक सेक्टर के मार्केट कैप से करीब ₹4.15 लाख करोड़ की गिरावट आ चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने एआई के खतरे पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी है.

Indian IT shares crash: भारतीय आईटी शेयरों ने शुक्रवार को पिछले 10 महीनों का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज किया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के बढ़ते प्रभाव को लेकर निवेशकों की चिंता ने पूरे सेक्टर में भारी बिकवाली करा दी.

फरवरी महीने में अब तक आईटी कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन से करीब 50 अरब डॉलर यानी लगभग ₹4.15 लाख करोड़ (1 डॉलर ≈ ₹83 के हिसाब से) की गिरावट आ चुकी है.

एंथ्रोपिक के नए टूल के बाद बढ़ी चिंता


पिछले महीने टेक स्टार्टअप Anthropic द्वारा एक नया एआई टूल लॉन्च किए जाने के बाद वैश्विक टेक शेयरों में गिरावट शुरू हुई.

विशेषज्ञों का मानना है कि जेनरेटिव एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से भारत का करीब 283 अरब डॉलर (लगभग ₹23.5 लाख करोड़) का आईटी सर्विसेज उद्योग प्रभावित हो सकता है.

निवेशकों को डर है कि कंपनियां अपने आईटी बजट को एआई टूल्स की ओर मोड़ सकती हैं, जिससे पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग घट सकती है.

निफ्टी आईटी में 8.2% की साप्ताहिक गिरावट


आईटी सेक्टर का प्रमुख इंडेक्स Nifty IT इस सप्ताह 8.2% टूट गया। यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है.

शुक्रवार को इंडेक्स एक समय 5.2% तक गिर गया था, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी आई और अंत में 1.44% की गिरावट के साथ बंद हुआ.

टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएलटेक में गिरावट

इस गिरावट में सबसे ज्यादा असर बड़ी कंपनियों पर दिखा.

  • Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर 2.1% गिरे.
  • Infosys में 1.2% की गिरावट आई.
  • HCLTech के शेयर 1.4% टूटे.

विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि एआई के कारण आईटी कंपनियां अपने ग्रोथ टारगेट से पीछे रह सकती हैं.


क्या निवेशकों ने जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी?


J.P. Morgan के विश्लेषकों के अनुसार, यह मान लेना कि एआई पूरी तरह आईटी सर्विस कंपनियों की जगह ले लेगा, “बहुत ही सरल सोच” है. उनका कहना है कि एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर को लागू करने, कस्टमाइज करने और मेंटेन करने में आईटी सर्विस कंपनियों की भूमिका आगे भी जरूरी रहेगी.

Henderson Far East Income के पोर्टफोलियो मैनेजर सैट दुहरा का कहना है कि आईटी कंपनियां अभी तक यह साफ तरीके से नहीं बता पाई हैं कि वे एआई को खतरे के बजाय अवसर में कैसे बदलेंगी.

‘बाय द डिप’ से आई हल्की रिकवरी


Centrum Broking के पीयूष पांडे के मुताबिक, शुक्रवार को आई आंशिक रिकवरी की वजह यह रही कि कई निवेशकों ने गिरावट को खरीदारी का मौका माना.

उनका कहना है कि एआई के खतरे को लेकर निवेशकों ने शायद जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी है. एआई के दौर में भी आईटी कंपनियां प्रासंगिक रहेंगी, भले ही उन्हें कम कर्मचारियों और नई रणनीति के साथ काम करना पड़े.

आगे क्या?


विशेषज्ञों का मानना है कि एआई से चुनौतियां जरूर आएंगी, लेकिन आईटी सर्विस कंपनियां टेक दुनिया की “प्लंबर” की तरह हैं—यानी बड़ी टेक प्रणालियों को जोड़ने और सुचारु रूप से चलाने में उनकी भूमिका अहम रहेगी.

अगर एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर को एआई एजेंट्स के जरिए दोबारा लिखा भी जाता है, तो उसे लागू करने और व्यवस्थित करने के लिए बड़े स्तर की आईटी सेवाओं की जरूरत बनी रहेगी.

फिलहाल, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है और निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि भारतीय आईटी कंपनियां एआई के इस दौर में खुद को कितनी तेजी से ढाल पाती हैं.