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'भारत कभी दबाव में नहीं आएगा', NSA अजीत डोभाल ने अमेरिका को दो टूक में दिया जवाब - हम ट्रंप के जाने के करेंगे इंतजार

सितंबर में NSA अजीत डोभाल ने वॉशिंगटन में मार्को रुबियो से कहा कि भारत ट्रंप के दबाव में नहीं झुकेगा. अगस्त में 50% टैरिफ और रूसी तेल खरीद को लेकर भारत-अमेरिका रिश्ते काफी बिगड़ गए थे. इसके बाद बातचीत बढ़ी और अमेरिकी टैरिफ 18% करने तथा दंडात्मक शुल्क हटाने का दावा सामने आया.

Ajit Doval To America: सितंबर में वॉशिंगटन दौरे पर NSA अजीत डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को साफ कहा—भारत किसी दबाव में नहीं झुकेगा, जरूरत पड़ी तो ट्रंप के कार्यकाल का इंतज़ार करेगा. इसके बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में नरमी दिखी और ट्रेड समझौते का रास्ता खुला.

सितंबर में NSA अजीत डोभाल ने वॉशिंगटन में मार्को रुबियो को संदेश दिया कि भारत ट्रंप के दबाव में नहीं आएगा. अगस्त में 50% टैरिफ और रूसी तेल खरीद पर आलोचना से रिश्ते बिगड़े थे. साल के अंत तक दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और टैरिफ घटाकर 18% करने का दावा सामने आया.

वॉशिंगटन में डोभाल का साफ संदेश

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सितंबर की शुरुआत में वॉशिंगटन दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात में साफ शब्दों में कहा कि भारत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में नहीं आएगा. डोभाल ने यह भी संकेत दिया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो भारत ट्रंप के कार्यकाल के खत्म होने तक इंतज़ार करने के लिए भी तैयार है.

यह दौरा ऐसे समय हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर चुके थे और भारत-अमेरिका के रिश्तों में खटास बढ़ चुकी थी.

रिश्तों में आई कड़वाहट और उसे कम करने की कोशिश

डोभाल का यह दौरा दरअसल नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के उद्देश्य से था. नई दिल्ली के अधिकारियों ने ब्लूमबर्ग को बताया कि डोभाल रुबियो के पास यह संदेश लेकर गए थे कि भारत पुराने विवादों को पीछे छोड़कर फिर से ट्रेड डील पर बातचीत शुरू करना चाहता है.

मुलाकात के दौरान डोभाल ने रुबियो से कहा कि भारत को ट्रंप या उनके वरिष्ठ सहयोगियों द्वारा ‘पुश’ नहीं किया जा सकता और भारत पहले भी मुश्किल अमेरिकी प्रशासन के साथ काम कर चुका है.

अगस्त में 50% टैरिफ और रूसी तेल पर विवाद

रिश्तों में गिरावट अगस्त में चरम पर पहुंची थी, जब ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगा दिया और भारत की ट्रेड पॉलिसी तथा रूस से तेल खरीद पर सार्वजनिक रूप से आलोचना की. इससे दोनों देशों के संबंधों में तीखी खटास आ गई थी.

डोभाल की पहल का असर?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल की इस पहल का असर दिखाई दिया. 16 सितंबर को ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन किया और उनकी तारीफ करते हुए कहा कि वे शानदार काम कर रहे हैं. साल के अंत तक दोनों नेताओं के बीच चार और बार बातचीत हुई, जिससे धीरे-धीरे ट्रेड समझ की दिशा में प्रगति हुई.

टैरिफ घटाकर 18% करने का दावा

सोमवार को ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक ट्रेड समझौता किया है, जिसके तहत भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 18% तक घटा दिया जाएगा. रूस से तेल खरीद पर लगाए गए 25% दंडात्मक शुल्क को भी हटाने की बात कही गई.

इसके बदले ट्रंप ने दावा किया कि भारत 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेगा, वेनेजुएला से तेल खरीदेगा और अमेरिकी आयात पर टैरिफ शून्य कर देगा. हालांकि, इस समझौते का कोई औपचारिक दस्तावेज दोनों पक्षों की ओर से जारी नहीं किया गया है.

भारत की दीर्घकालिक रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, डोभाल की मुलाकात का मकसद यह संकेत देना था कि भारत अमेरिका को एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है और रिश्तों को और बिगड़ने नहीं दे सकता.

नई दिल्ली का मानना था कि चीन से मुकाबला करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमेरिका की पूंजी, तकनीक और सैन्य सहयोग की जरूरत है. अधिकारियों का मानना था कि ट्रंप एक अस्थायी चरण हैं, जबकि भारत को अपने दीर्घकालिक हितों पर फोकस रखना है.

पहले भी बढ़ी थी तल्खी

रिश्तों में गिरावट की शुरुआत साल की शुरुआत में ही हो गई थी, जब ट्रंप ने मई में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिन चले टकराव को सुलझाने का श्रेय खुद लिया था. इस दावे को भारतीय सेना और प्रधानमंत्री मोदी ने खारिज कर दिया था.

बाद में, जब ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी नेतृत्व की मेजबानी की, तो प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निमंत्रण पर व्हाइट हाउस जाने से इनकार कर दिया.

नए अमेरिकी राजदूत से बढ़ी उम्मीद

दिसंबर में नई दिल्ली में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के आगमन ने रिश्तों को सुधारने की कोशिशों में नई गति दी. गोर, जो व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और ट्रंप व रुबियो दोनों के करीबी माने जाते हैं, भारत-अमेरिका संबंधों के महत्व पर लगातार जोर देते रहे हैं.

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