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अब नहीं बिकेगी ये पेनकिलर! Nimesulide के 100 mg से ज्यादा डोज अब पूरी तरह क्यों लगाया गया बैन?

भारत सरकार ने 100 mg से ज्यादा डोज वाली नाइमेसुलाइड ओरल दवाओं पर पूरी तरह बैन लगा दिया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह दवा लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है. अब कंपनियों को हाई-डोज नाइमेसुलाइड का उत्पादन रोककर बाजार से स्टॉक वापस लेना होगा.

Nimesulide ban India: भारत सरकार ने आम लोगों की सेहत से जुड़े एक अहम फैसले में नाइमेसुलाइड (Nimesulide) दवा की 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली ओरल फॉर्मुलेशन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि अब 100 mg से ज्यादा डोज वाली नाइमेसुलाइड का निर्माण, बिक्री और वितरण पूरी तरह अवैध होगा। यह फैसला एहतियातन कदम के तौर पर लिया गया है और तुरंत प्रभाव से लागू हो चुका है.

आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

नाइमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर दर्द, सूजन और बुखार में किया जाता है. भारत में यह दवा लंबे समय से प्रचलन में रही है, लेकिन उच्च डोज को लेकर इसके साइड इफेक्ट्स पर लगातार सवाल उठते रहे हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 100 mg से अधिक की ओरल डोज मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. यह फैसला ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिश और ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिसमें दवा से जुड़े जोखिमों को रेखांकित किया गया था.

लिवर और किडनी पर पड़ सकता है खतरनाक असर

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि नाइमेसुलाइड खासतौर पर लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर तब जब इसे ज्यादा मात्रा में लिया जाए. कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में भी इस दवा को लिवर टॉक्सिसिटी, लिवर फेल्योर और अन्य गंभीर जटिलताओं से जोड़ा गया है.

बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा बताया गया है. गौर करने वाली बात यह है कि भारत में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नाइमेसुलाइड पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है.

मरीजों और दवा बाजार पर क्या होगा असर?

यह प्रतिबंध सिर्फ 100 mg से अधिक की तत्काल असर वाली ओरल डोज पर लागू होगा. यानी कम मात्रा वाली नाइमेसुलाइड और अन्य पेनकिलर दवाएं बाजार में उपलब्ध रहेंगी.

सरकार के आदेश के बाद दवा कंपनियों को हाई-डोज नाइमेसुलाइड का उत्पादन रोकना होगा और फार्मेसियों से पहले से मौजूद स्टॉक वापस मंगाना पड़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े फार्मा कंपनियों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन छोटी कंपनियां जो इस दवा पर ज्यादा निर्भर थीं, उन्हें नुकसान हो सकता है.

सुरक्षा को प्राथमिकता, मरीजों को दी गई सलाह

यह फैसला सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दुनिया के कई देशों ने नाइमेसुलाइड को कभी मंजूरी ही नहीं दी, जबकि कुछ देशों में इसके इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां हैं. भारत सरकार का यह कदम भी 'सेफ्टी फर्स्ट' नीति का हिस्सा माना जा रहा है.

डॉक्टर्स की सलाह है कि जो मरीज नियमित रूप से नाइमेसुलाइड लेते रहे हैं, वे अपने डॉक्टर से वैकल्पिक पेनकिलर या इलाज के विकल्पों पर चर्चा जरूर करें, ताकि भविष्य में किसी तरह का स्वास्थ्य जोखिम न हो.

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