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भारत में बढ़ रहे कोविड-19 मामले, JN.1 वैरिएंट बन रही नई चिंता, जानें लक्षण, जोखिम और बचाव के उपाय

Covid 19 Cases India: भारत कोविड मामलों में हालिया उछाल से काफी हद तक अप्रभावित रहा है, सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है. भारत में कोविड-19 के मामले केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में ज्यादा केस मिले हैं. हालांकि, इसमें गंभीरता ज्यादा नहीं है.

Covid 19 Cases India: दक्षिण-पूर्व एशिया में कोविड-19 के मामलों में अचानक वृद्धि के बाद भारत में भी हाल ही में संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं. सबसे ज्यादा केस केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों से रिपोर्ट हो रहे हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक अधिकतर केस हल्के लक्षणों वाले हैं और इससे जुड़ी गंभीर बीमारी या मृत्यु की खबर नहीं है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 12 मई से अब तक 164 मामले सामने आए हैं और मंगलवार को देश में सक्रिय कोविड संक्रमण की कुल संख्या 257 थी. केरल में सबसे ज़्यादा 69 मामले सामने आए, उसके बाद महाराष्ट्र में 44 और तमिलनाडु में 34 मामले सामने आए. वायरस का JN.1 सब-वैरिएंट, जिसे एशिया में उछाल का हिस्सा माना जाता है. हालांकि, सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है.

क्या है JN.1 वैरिएंट?

JN.1 ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही एक सब-वैरिएंट है, जिसे वैज्ञानिक BA.2.86 या 'पाइरोला स्ट्रेन' की अगली पीढ़ी मानते हैं. इसमें लगभग 30 म्यूटेशन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यह ज्यादा खतरनाक नहीं साबित हुआ है. संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्ट्रेन ज्यादा तेजी से फैलता है और हमारी इम्युनिटी को चकमा दे सकता है, लेकिन इसके लक्षण अभी तक ओमिक्रॉन जैसे ही हैं. 

क्या हैं इसके लक्षण?

JN.1 वैरिएंट से संक्रमित मरीजों में अब तक फ्लू जैसे सामान्य लक्षण ही देखे गए हैं:

  • गले में खराश
  • हल्का बुखार
  • खांसी
  • नाक बहना
  • कुछ मामलों में उल्टी या जी मिचलाना
  • आंखों में हल्की जलन (कंजक्टिवाइटिस जैसा)

ये लक्षण सामान्य फ्लू या वायरल बुखार से मिलते-जुलते हैं और अधिकतर मामलों में घर पर आराम, पानी पीना और एंटीवायरल दवाएं लेने से सुधार हो रहा है.

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

हालांकि सामान्य लोगों के लिए खतरा कम है, लेकिन कुछ खास समूहों को सतर्क रहने की जरूरत है:

  • बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • छोटे बच्चे
  • डायबिटीज, किडनी डिजीज, HIV, ट्रांसप्लांट पेशेंट्स जैसे इम्युनो-कॉम्प्रोमाइज्ड लोग

इन लोगों के लिए कोविड-19 ज्यादा जटिलताएं पैदा कर सकता है.

क्या दोबारा वैक्सीन लेने की जरूरत है?

नहीं, फिलहाल पुराने वैक्सीन्स JN.1 पर असरदार नहीं माने जा रहे क्योंकि वो पुराने स्ट्रेन्स के लिए बनाए गए थे. अब जरूरत है mRNA टेक्नोलॉजी पर आधारित नई वैक्सीन, जैसे Gemcovac-19, जो नए वैरिएंट्स के हिसाब से तेजी से बदली जा सकती है और सामान्य तापमान (2-8 डिग्री सेल्सियस) पर स्टोर की जा सकती है, लेकिन फिलहाल ये वैक्सीन आसानी से उपलब्ध नहीं है.

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