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'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चार टुकड़ों में बंट जाता पाकिस्तान', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का क्या है मतलब?

Pakistan Split Into Four Parts: राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अगर वह भारत से बातचीत चाहता है तो उसे हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को भारत के हवाले करना होगा. उन्होंने INS विक्रांत से दिए बयान में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में अगर भारतीय नौसेना पूरी ताकत में उतरती तो पाकिस्तान के चार टुकड़े हो जाते.

Pakistan Split Into Four Parts: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अगर नौसेना पूरी ताकत से उतरती, तो पाकिस्तान आज चार टुकड़ों में बंट चुका होता. उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय नौसेना ने अरब सागर में आक्रामक तैनाती और मिसाइल हमलों के ज़रिए पाकिस्तानी सेना को जकड़ कर रखा.

राजनाथ सिंह ने यह बयान भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर नौसेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए दिया. उन्होंने यह भी कहा कि 1971 की जंग इसका गवाह है कि जब भारतीय नौसेना एक्शन में आई थी तो पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया था. आज की नौसेना उससे कहीं ज़्यादा ताकतवर, आधुनिक और सतर्क है.

चार टुकड़ों में कैसे बंट सकता है पाकिस्तान?

दरअसल, पाकिस्तान खुद चार भागों में बंटा है. ये बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तुनख्वाह और पंजाब हैं. इनमें से बलूचिस्तान पहले से ही खुद की आजादी के लिए संघर्ष कर रहा है और तो और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने तो खुद को एक आजाद मुल्क घोषित भी कर दिया था. खास बात ये है कि इन चारों पार्ट्स में रहने वाले लोगों का धर्म तो एक है, लेकिन कल्चर, भाषा और पहनावा बिल्कुल अलग-अलग है. आइए इन प्रांतों के बारे में एक-एक कर बात करते हैं. 

बलूचिस्तान

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे अमीर लेकिन सबसे ज़्यादा उत्पीड़ित प्रांत है, जिसका विशाल गैस, सोना, तांबा और तेल भंडार के लिए शोषण किया गया है, जबकि इसके लोग गरीबी में जी रहे हैं. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) ने स्थिति को और खराब कर दिया है, जिसमें चीन पाकिस्तान की सेना के संरक्षण में बलूच संसाधनों को लूट रहा है.ऐसे में पाकिस्तान की ओर से शोषण के खिलाफ बलूचों ने खुब आवाज उठाई है और समय-समय पर यहां विद्रोह होते रहते हैं. 

खैबर पख्तूनख्वा (KPK)

खैबर पख्तूनख्वा (KPK) पश्तून आबादी का घर है, जिसका पाकिस्तान के साथ हमेशा से ही तनावपूर्ण संबंध रहा है. 1893 में अंग्रेजों द्वारा लगाई गई एक कृत्रिम सीमा, डूरंड रेखा ने पश्तूनों को अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत के बीच विभाजित कर दिया. पाकिस्तान के निर्माण के बाद भी पश्तूनों ने कभी भी डूरंड रेखा को वैध सीमा के रूप में पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया.
दशकों से पाकिस्तान ने पश्तून राष्ट्रवाद को दबाया है.

कई पश्तून अब खुले तौर पर पाकिस्तान का हिस्सा बने रहने के बजाय अफगानिस्तान या अलग पश्तूनिस्तान के साथ एकीकरण की मांग कर रहे हैं. पाकिस्तान की सेना पहले से ही नियंत्रण बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है और चूंकि अफगानिस्तान डूरंड रेखा को मान्यता देने से इनकार कर रहा है, इसलिए एक बड़ा पश्तून विद्रोह पनप रहा है.

पाकिस्तान का पंजाब प्रांत

दशकों तक पंजाब ने पाकिस्तान की सेना, अर्थव्यवस्था और राजनीति को नियंत्रित किया, जबकि अन्य प्रांतों का शोषण किया. हालांकि, अब स्थिति बदल गई है. रिकॉर्ड मुद्रास्फीति, राजनीतिक अराजकता और आर्थिक पतन के साथ, पंजाब भी अब संकट में है. पंजाबी बहुल सत्ता के प्रति नाराजगी बढ़ रही है और जैसे-जैसे अन्य प्रांत अलग होने की मांग कर रहे हैं, पंजाब खुद को अलग-थलग और शक्तिहीन पा रहा है. पाकिस्तान का पतन अब केवल एक डर नहीं रह गया है-यह एक वास्तविकता बन रहा है.

पाकिस्तान का सिंध प्रांत

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की आज़ादी की मांग जय सिंधु स्वतंत्रता आंदोलन (JSFM) द्वारा की जा रही है. सिंध के लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि सिंध का एक अलग, स्वतंत्र राज्य हो. अल्पसंख्यक सिंधी समुदाय ने इस्लामिक स्टेट ऑफ़ पाकिस्तान पर उर्दू भाषा थोपने और ज़मीन हड़पने जैसे व्यवस्थित उत्पीड़न के ज़रिए उनकी स्थानीय संस्कृति को मिटाने का आरोप लगाया है. पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा कई स्वतंत्रता समर्थक कार्यकर्ताओं को मार दिया गया है, प्रताड़ित किया गया है और जबरन गायब कर दिया गया है.

पाकिस्तान की दोहरी नीति पर हमला

रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वो बातचीत की बात करता है, दूसरी ओर उसके ज़मीन से भारत विरोधी गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं. उन्होंने कहा, 'भारत साफ कर चुका है कि बातचीत सिर्फ आतंकवाद और POK पर ही होगी.'

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