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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट साबित हुई झूठी, SEBI ने अडानी ग्रुप को दिया क्लीन चिट - 'सभी ट्रांजैक्शन वैध और पारदर्शी'

SEBI ने गौतम अडानी और अडानी ग्रुप की कंपनियों पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. हिंडनबर्ग रिसर्च ने 2021 में ग्रुप पर रिलेटेड पार्टी डीलिंग का आरोप लगाया था, लेकिन SEBI की जांच में पाया गया कि सभी लेनदेन वैध थे, लोन समय पर चुकाए गए और किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं हुई. इस फैसले से अडानी ग्रुप को बड़ी राहत मिली है और आरोपों पर अंतिम रूप से विराम लग गया है.

Adani Group SEBI Verdict: बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अडानी ग्रुप और उसके चेयरमैन गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

SEBI ने साफ कहा कि अडानी ग्रुप की कंपनियों – अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अडानी पावर – पर लगाए गए 'रिलेटेड पार्टी डीलिंग' के आरोप निराधार हैं.

आरोप क्या थे?

जनवरी 2021 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने दावा किया था कि अडानी ग्रुप ने Adicorp Enterprises, Milestone Tradelinks और Rehvar Infrastructure नाम की तीन कंपनियों के जरिए फंड्स को इधर-उधर घुमाया और ग्रुप की कंपनियों के बीच लेनदेन किए.

SEBI ने क्या कहा?

SEBI ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि उस समय लागू नियमों के हिसाब से ये डीलिंग्स 'रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन' की परिभाषा में नहीं आती थीं. 2021 में नियमों में बदलाव के बाद ही इन लेनदेन को इस श्रेणी में रखा गया.

  • सभी लोन समय पर चुकाए गए.
  • फंड्स का इस्तेमाल निर्धारित कामों में हुआ.
  • किसी तरह की धोखाधड़ी या अनुचित ट्रेडिंग प्रैक्टिस नहीं हुई.
  • इस आधार पर SEBI ने अडानी ग्रुप के खिलाफ सभी कार्यवाहियां बंद कर दीं.

पूर्व SEBI अधिकारी का बयान

NDTV से बातचीत में SEBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक जे.एन. गुप्ता ने कहा, 'यह आदेश साफ कर देता है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं थी. मगर इसने यह भी उजागर किया है कि हम बिना तथ्य के कितनी चीजों पर विश्वास कर लेते हैं और यह कि हमारी व्यवस्था को तेज़ होना चाहिए. इस निष्कर्ष तक पहुंचने में दो साल से ज्यादा लग गए, जिसका नुकसान छोटे निवेशकों को उठाना पड़ा, जिन्होंने घबराकर अपने निवेश बेच दिए.'

अडानी ग्रुप की प्रतिक्रिया

अडानी ग्रुप पहले से ही इन आरोपों को झूठा और दुर्भावनापूर्ण करार देता आया है. हिंडनबर्ग का संस्थापक नेट एंडरसन इस साल जनवरी में अपनी रिसर्च फर्म बंद करने का ऐलान भी कर चुका है.

गौतम अडानी ने पहले भी कहा था कि यह हमला सिर्फ वित्तीय नहीं था बल्कि हमारी स्थिरता और साख को चोट पहुंचाने की सोची-समझी चाल थी। यह वार हमारे FPO के ठीक पहले किया गया ताकि अधिकतम नुकसान हो, लेकिन हमने हर बार गिरकर और मज़बूत होकर उठने की क्षमता साबित की है.

2023 की शुरुआत में हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त गिरावट आई थी. ग्रुप को बाजार में करीब 100 अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा था. अब SEBI के इस फैसले के बाद अडानी ग्रुप को बड़ी कानूनी और प्रतिष्ठात्मक राहत मिली है.

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