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सिर्फ 43 किमी फेंसिंग, 1600 किमी बॉर्डर पर खतरा, भारत-म्यांमार बॉर्डर पर घुसपैठ, ड्रोन और उग्रवाद का कनेक्शन!

भारत-म्यांमार सीमा पर विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं. ड्रोन तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों को लेकर सरकार ने फेंसिंग और निगरानी बढ़ाई है. हालांकि, स्थानीय विरोध और सीमित प्रगति के चलते प्रोजेक्ट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

India Myanmar border news: भारत-म्यांमार सीमा पर हाल ही में सात विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं. इन लोगों में छह यूक्रेन के नागरिक और एक अमेरिकी शामिल है, जिन पर आरोप है कि वे मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में घुसे और वहां उग्रवादी समूहों को हथियार और ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे.

विदेशी नागरिकों पर गंभीर आरोप

जांच एजेंसी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के मुताबिक, ये विदेशी नागरिक यूरोप से ड्रोन लाकर भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचा रहे थे. इन ड्रोन का इस्तेमाल म्यांमार के सशस्त्र जातीय समूह (Ethnic Armed Groups) कर रहे थे.

सीमा पर सुरक्षा को लेकर सरकार की चिंता

भारत और म्यांमार के बीच कुल 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है, लेकिन इसमें से अब तक केवल करीब 43 किलोमीटर हिस्से पर ही फेंसिंग (बाड़) लग पाई है.

सरकार ने संसद की एक समिति को बताया कि:

  • कुल 390.39 किमी फेंसिंग को मंजूरी दी गई है
  • इसमें से 43.75 किमी पर काम पूरा हो चुका है
  • बाकी 346.64 किमी पर काम जारी है

यह प्रोजेक्ट मार्च 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) द्वारा करीब 31,000 करोड़ रुपये की लागत से मंजूर किया गया था.

बॉर्डर पर एंट्री-एग्जिट गेट और बायोमेट्रिक सिस्टम

सीमा पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने खास गेट बनाए हैं, जहां:

  • लोगों के बायोमेट्रिक डेटा लिए जाते हैं
  • फोटो रिकॉर्ड किया जाता है
  • गेट पास सिस्टम लागू है

पहले ऐसे 43 गेट बनाए गए थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 38 रह गई है, जिनमें से सिर्फ 20 ही अभी काम कर रहे हैं. मिजोरम सीमा पर 5 गेट बंद भी करने पड़े क्योंकि उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा था.

स्थानीय लोगों का विरोध

सीमा पर रहने वाले लोगों ने इस फेंसिंग प्रोजेक्ट का विरोध भी किया है. इसकी वजह यह है कि भारत और म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच गहरे पारिवारिक रिश्ते और सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव मौजूद हैं, जिससे आवाजाही पर रोक से उनकी जिंदगी प्रभावित होती है.

'फ्री मूवमेंट रिजीम' में बदलाव

भारत और म्यांमार के बीच एक खास व्यवस्था है जिसे Free Movement Regime (FMR) कहा जाता है. इसके तहत सीमावर्ती लोग बिना वीजा-पासपोर्ट के एक तय दूरी तक आ-जा सकते थे.

अब सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए:

  • सीमा पार आने-जाने की दूरी 16 किमी से घटाकर 10 किमी कर दी है
  • निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है

सीमा पर तैनात सुरक्षा बल

भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी असम राइफल्स के पास है, जो देश का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है.

सड़क निर्माण भी शुरुआती चरण में

सीमा क्षेत्र में सड़क निर्माण की स्थिति भी अभी शुरुआती दौर में है:

  • कुल 3,194.8 किमी सड़क को मंजूरी
  • 941.9 किमी स्वीकृत
  • सिर्फ 11.5 किमी ही तैयार
  • 930 किमी पर काम जारी

सरकार का क्या कहना है?

सरकार का कहना है कि सीमा पर अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों को रोकने के लिए स्थानीय लोगों के साथ समन्वय, म्यांमार सेना के साथ सहयोग और ड्रोन से निपटने के लिए संयुक्त तंत्र जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.

भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं. विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी और ड्रोन तस्करी जैसे मामलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. ऐसे में सरकार फेंसिंग, निगरानी और नियमों में बदलाव के जरिए सीमा को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और जमीनी चुनौतियां इस काम को मुश्किल बना रही हैं.

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