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क्या अब दिल्ली की सड़कों पर नहीं दिखेगा CNG ऑटोरिक्शा? परिवहन मंत्री ने बताई सच्चाई, नई EV नीति का समझिए पूरा गणित

New EV Policy In Delhi: दिल्ली में नई EV नीति लाने का सरकार का मुख्य उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण को कम करना है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि धीरे-धीरे दिल्ली की सड़कों पर बैटरी से चलने वाली गाड़ियां ही दौरे और इसके सरकार ने अपना पूरा रोड़मैप भी बना रखा है.

New EV Policy In Delhi: दिल्ली की नई बीजेपी सरकार राजधानी में इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए नई EV नीति लेकर आई, जिसके तहत कहा गया कि नई ईवी नीति से शहर भर में चार्जिंग और स्वैपेबल बैटरी स्टेशनों का नेटवर्क स्थापित होने से 20,000 नौकरियां पैदा हो सकती हैं. हालांकि, इसके बाद खबर ये भी आ रही थी कि दिल्ली में पुराने EV ऑटोरिक्शा को हटा दिया जाएगा, जिसके इनके EV ऑटोरिक्शा चालक टेंशन में आ गए थे. अब इसे लेकर परिवहन मंत्री ने सच्चाई सबके लाते हुए, इसे महज एक अफवाह बताया है. 

ईवी नीति पर दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा, 'मैंने आपको पहले भी बताया था कि हमारी कैबिनेट की बैठक हुई है. हम इस पर चर्चा कर रहे हैं. गलत सूचना है कि ऑटोरिक्शा बंद कर दिए जाएंगे. ऐसा कुछ नहीं है. सभी वाहन चलते रहेंगे. दिल्ली के लोगों को सभी अच्छी सुविधाएं दी जाएंगी.' 

EV नीति और बिजली सब्सिडी को दी मंजूरी

मंगलवार को दिल्ली सरकार ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति को तीन महीनों के लिए बढ़ाने और राजधानी में बिजली सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया. 

बैठक में यह भी तय किया गया कि मौजूदा बिजली सब्सिडी को चार श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए आगे भी जारी रखा जाएगा — 1. घरेलू उपभोक्ता 2. किसान 3. चैंबर वाले वकील 4.1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित. 

दो पहिया वाहन के लिए EV नीति 

EV (इलेक्ट्रिक वाहन) नीति 2.0 में दोपहिया वाहनों को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है. दोपहिया वाहन राज्य में प्रदूषण फैलाने वाले सबसे बड़े स्रोतों में से एक हैं. दिल्ली की नई EV नीति के तहत 31 दिसंबर, 2027 तक 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक व्हीकल राजधानी में लाने की कोशिश है.

इस नए मसौदा नीति के अनुसार, पेट्रोल या डीजल से चलने वाले नए दोपहिया वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद करने का प्रस्ताव है. यानी भविष्य में सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को ही बेचने और रजिस्टर कराने की अनुमति होगी. 

नया इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ड्राफ्ट पॉलिसी:

1. दो-पहिया वाहन (बाइक, स्कूटर):

15 अगस्त से पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी से चलने वाले नए दो-पहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा. जो पुराने वाहन हैं, वो अपनी तय समय सीमा तक चल सकेंगे, लेकिन भविष्य में उन्हें जल्दी हटाया भी जा सकता है. 

2. तीन-पहिया वाहन (ऑटो रिक्शा):

सरकार अब सीएनजी ऑटो को भी धीरे-धीरे हटाना चाहती है. 15 अगस्त से CNG ऑटो के नए परमिट नहीं दिए जाएंगे और पुराने परमिट रिन्यू भी नहीं होंगे.

अब केवल ई-ऑटो (इलेक्ट्रिक ऑटो) के परमिट ही जारी होंगे. दिल्ली में 1 लाख से ज्यादा ऑटो हैं. इनमें से ज़्यादातर CNG से चलते हैं. अगर इन्हें इलेक्ट्रिक में बदला जाए तो प्रदूषण और खर्च दोनों कम होंगे.

3. बसें (पब्लिक ट्रांसपोर्ट):

दिल्ली की सार्वजनिक बसों को भी इलेक्ट्रिक बनाया जाएगा. DTC और DIMTS अब सिर्फ शहर के अंदर चलने के लिए इलेक्ट्रिक बसें ही खरीदेंगे. दूसरी जगह जाने के लिए (इंटरस्टेट) BS-VI मानक की बसें इस्तेमाल होंगी. 

4. माल ढोने वाले वाहन (गुड्स कैरियर्स):

15 अगस्त से पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी से चलने वाले नए कमर्शियल मालवाहक वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी बंद होगा. इन वाहनों को भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा. 

5. प्राइवेट कारें:

जिन लोगों के पास पहले से दो या उससे ज्यादा कारें हैं, वे अब सिर्फ इलेक्ट्रिक कार ही खरीद सकेंगे. इसका मकसद है – ज़्यादा प्रदूषण को रोकना और हवा की गुणवत्ता सुधारना.

6. चार्जिंग स्टेशन:

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ज़रूरी चार्जिंग पॉइंट्स बढ़ाए जाएंगे. पूरी दिल्ली में नए EV चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को सपोर्ट मिल सके. 

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