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पत्नी को पढ़ाई से रोक रहे तो हो जाइए सावधान! MP हाई कोर्ट के मुताबिक-दूर हो जाएगी आपकी 'लुगाई'

Madhya Pradesh high court: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनावाई करते हुए कहा कि पत्नी को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता माना जा सकता है और ये हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के लिए वैध आधार है. इसी आधार पर कोर्ट ने एक महिला को तलाक दे दिया.

Madhya Pradesh high court: अगर आप भी अपनी पत्नी को पढ़ाई करने से रोक रहे हैं, तो सावधान हो जाइए क्योंकि इसे आधार बनाकर वह आपको तलाक दे सकती है. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट कह रहा है. कोर्ट ने तो यहां तक कह दिया कि पत्नी को पढ़ाई से रोकना एक क्रूरता है. 

दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पत्नी को पढ़ाई बंद करने के लिए मजबूर करना 'मानसिक क्रूरता' के बराबर हो सकता है और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार हो सकता है. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस गजेंद्र सिंह की इंदौर खंडपीठ ने एक महिला को तलाक देते हुए यह टिप्पणी की, जिसने आरोप लगाया था कि उसके पति और ससुराल वालों ने उसे बारहवीं कक्षा के बाद पढ़ाई करने से रोका था.

'पढ़ाई से रोकना मानसिक क्रूरता'

कोर्ट ने कहा, 'पत्नी को पढ़ाई बंद करने के लिए मजबूर करना या ऐसा माहौल बनाना कि वह पढ़ाई जारी न रख सके, वैवाहिक जीवन की शुरुआत में उसके सपनों को नष्ट करने के बराबर है और उसे ऐसे व्यक्ति के साथ रहने के लिए मजबूर करना जो न तो शिक्षित है और न ही खुद को बेहतर बनाने के लिए उत्सुक है. यह निश्चित रूप से मानसिक क्रूरता के बराबर है और हम मानते हैं कि यह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) के तहत तलाक का आधार बनता है.'

'शिक्षा जीवन का एक पहलू है'

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि 'शिक्षा जीवन का एक पहलू है' और इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' का एक अभिन्न अंग माना जाता है. इसका अर्थ है कि गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए शिक्षा तक पहुंच आवश्यक है. 

Bsc करना चाहती है महिला

बता दें कि महिला ने 2015 में शाजापुर में शादी के समय 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी. उसने अपनी याचिका में कहा कि वह Bsc की डिग्री हासिल करना चाहती थी, लेकिन उसके पति और ससुराल वाले इसकी इजाजत नहीं देंगे. इसलिए उसने तलाक मांगा। 2020 में एक फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया और यह कहा कि पत्नी बिना किसी उचित बहाने के अपने पति से अलग हो गई थी. इसके बाद पत्नी ने हाईकोर्ट का रुख किया. 

फैमिली कोर्ट के फैसले को किया खारिज

फैसले के दौरान कोर्ट ने ये भी कहा, 'यह साबित हो चुका है कि पति ने पत्नी के साथ मानसिक क्रूरता से पेश आया और यह पति से अलग रहने का एक उचित आधार है. यह भी एक तथ्य है कि 1 मई, 2015 को विवाह के बाद से 10 सालों में याचिकाकर्ता और प्रतिवादी जुलाई 2016 के महीने में केवल तीन दिनों के लिए एक साथ थे.' इसके साथ ही कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया. 

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