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देशद्रोह कानून से लेकर OROP तक: सुप्रीम कोर्ट के नए CJI जस्टिस सूर्यकांत के 7 ऐतिहासिक फैसले

जानिए हरियाणा के एक मध्यमवर्गीय परिवार से सुप्रीम कोर्ट की शीर्ष कुर्सी तक पहुंचे जस्टिस सूर्यकांत के जीवन, करियर और उन 10 ऐतिहासिक फैसलों के बारे में जिन्होंने भारतीय न्यायपालिका की दिशा बदल दी.

CJI Justice Surya Kant: भारत को नया मुख्य न्यायाधीश (CJI) मिल गया है. जस्टिस सूर्यकांत को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है. वे 24 नवंबर 2025 को पदभार ग्रहण करेंगे. केंद्रीय कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया. वे जस्टिस भूषण आर. गवई की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 23 नवंबर को समाप्त हो रहा है.

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. वे 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने. सरल पृष्ठभूमि से उठकर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंचने तक का उनका सफर प्रेरणादायक माना जा रहा है.

लगभग दो दशक से अधिक के अनुभव के साथ वे देश की शीर्ष न्यायपालिका में कई अहम फैसलों में अपनी न्यायिक समझ और दूरदृष्टि के लिए पहचाने जाते हैं.

जस्टिस सूर्यकांत के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले

जस्टिस सूर्यकांत ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे ऐतिहासिक और दूरगामी फैसले सुनाए हैं, जिनका देश की न्यायव्यवस्था, लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर गहरा प्रभाव पड़ा. उनके प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं:

1. देशद्रोह कानून (Sedition Law) पर ऐतिहासिक रोक:

औपनिवेशिक काल के इस कानून पर रोक लगाने वाले पीठ का हिस्सा रहे. कोर्ट ने निर्देश दिया था कि समीक्षा पूरी होने तक इस कानून के तहत कोई नई FIR दर्ज न की जाए.

2. चुनावी पारदर्शिता को बढ़ावा:

बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में चुनाव आयोग को यह विवरण सार्वजनिक करने के निर्देश दिए. यह पारदर्शिता के पक्ष में बड़ी पहल मानी गई.

3. बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण:

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित देशभर की बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का ऐतिहासिक आदेश दिया.

4. PM मोदी की पंजाब यात्रा सुरक्षा चूक की जांच:

2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए इंडू मल्होत्रा की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति बनाने वाले पीठ का हिस्सा रहे. कोर्ट ने कहा—ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टि आवश्यक है.

5. वन रैंक-वन पेंशन (OROP) को संवैधानिक मान्यता:

रक्षा बलों के लिए OROP योजना को सही ठहराते हुए इसे संवैधानिक रूप से वैध बताया. साथ ही महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन में बराबरी दिलाने वाली याचिकाओं पर भी फैसला सुनाया.

6. AMU के अल्पसंख्यक दर्जे पर बड़ा फैसला:

सात जजों की उस पीठ का हिस्सा रहे जिसने 1967 के फैसले को पलटते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खोला.

7. पेगासस जासूसी मामले में सरकार को चेतावनी:

विवादित पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई कर विशेषज्ञ समिति गठित की. टिप्पणी की—सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर सभी मामलों में फ्री पास नहीं पा सकती.

कितने समय तक रहेंगे CJI?

जस्टिस सूर्यकांत लगभग 15 महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश पद पर रहेंगे. वे 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे.

राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, कानून मंत्री ने दी बधाई

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, 'भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, राष्ट्रपति ने जस्टिस सूर्यकांत को 24 नवंबर 2025 से भारत का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। मैं उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं.'

जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश में कई संवैधानिक, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मुद्दे चर्चा में हैं. ऐसे में उनसे न्यायपालिका को और मजबूत दिशा देने की उम्मीद जताई जा रही है.

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