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बांग्लादेश से टेंशन के बीच ढाका जाएंगे एस जयशंकर, खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल, भारत के लिए क्यों थीं महत्वपुर्ण?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख बेगम खालिदा जिया का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है.

Khaleda Zia Death: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त किया है. भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर बुधवार को ढाका जाकर उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे. यह जानकारी विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में दी गई है.

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, 'विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत सरकार और भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व करेंगे. वह 31 दिसंबर 2025 को ढाका की यात्रा करेंगे.'

80 वर्ष की उम्र में हुआ निधन, लंबे समय से थीं बीमार

बेगम खालिदा जिया का निधन बुधवार तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में हुआ. उनकी उम्र 80 वर्ष थी और वह लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की ओर से फेसबुक पर जारी बयान में कहा गया कि खालिदा जिया का निधन सुबह करीब 6 बजे, फज्र की नमाज़ के तुरंत बाद हुआ.

BNP के बयान में कहा गया, 'हम उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ करते हैं और सभी से अपील करते हैं कि वे उनकी मग़फिरत के लिए प्रार्थना करें.'

नवंबर से अस्पताल में भर्ती थीं खालिदा जिया

खालिदा जिया को 23 नवंबर को फेफड़ों में संक्रमण के चलते ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह लंबे समय से हृदय रोग, मधुमेह, गठिया, लीवर सिरोसिस और किडनी से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित थीं. इसी महीने की शुरुआत में उन्हें बेहतर इलाज के लिए लंदन भी भेजा गया था, लेकिन हालात में खास सुधार नहीं हो पाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया गहरा शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खालिदा जिया के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें खालिदा जिया के निधन की खबर से गहरा आघात पहुंचा है.

प्रधानमंत्री ने लिखा, 'ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन से गहरा दुख हुआ. उनके परिवार और बांग्लादेश की जनता के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं. ईश्वर उनके परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे.'

अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि

खालिदा जिया के निधन पर दुनियाभर के नेताओं ने शोक संदेश जारी किए हैं. नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने उन्हें एक महान लोकतांत्रिक नेता बताते हुए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि खालिदा जिया का सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम अध्याय रहा है.

सुशीला कार्की ने खालिदा जिया को 'नेपाल की सच्ची मित्र' बताते हुए कहा कि उन्होंने नेपाल-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत

बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और देश की राजनीति में दशकों तक प्रभावशाली भूमिका निभाती रहीं. उनके निधन को बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है.

भारत-बांग्लादेश रिश्तों की अहम कड़ी रहीं खालिदा जिया

बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की उन गिनी-चुनी नेताओं में थीं, जिन्होंने दो बार प्रधानमंत्री रहते हुए भारत के साथ रिश्तों को एक व्यावहारिक और रणनीतिक दिशा देने की कोशिश की. भले ही उनकी पार्टी BNP को अक्सर भारत-विरोधी कहा गया, लेकिन हकीकत यह है कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने भारत से सीधे संवाद के दरवाज़े खुले रखे.

उत्तर-पूर्व भारत की सुरक्षा से सीधा संबंध

भारत के लिए खालिदा जिया इसलिए भी महत्वपूर्ण थीं क्योंकि उनके कार्यकाल में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रही. उस दौर में भारत लगातार बांग्लादेश से यह मांग करता रहा कि भारतीय उग्रवादी संगठनों को बांग्लादेशी जमीन इस्तेमाल न करने दी जाए.

हालांकि इस मुद्दे पर मतभेद रहे, लेकिन खालिदा जिया सरकार के साथ संवाद और कूटनीतिक चैनल कभी पूरी तरह बंद नहीं हुए, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम था.

भारत-विरोध की छवि के बावजूद बातचीत की नेता

खालिदा जिया की राजनीतिक छवि भले ही शेख हसीना से अलग और अपेक्षाकृत चीन-पाकिस्तान के करीब मानी जाती रही हो, लेकिन भारत उन्हें हमेशा एक संभावित संवादकर्ता के रूप में देखता रहा.

भारत की विदेश नीति में यह स्पष्ट रहा है कि बांग्लादेश में किसी एक पार्टी या नेता पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए, और इसी वजह से खालिदा जिया भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक राजनीतिक केंद्र थीं.

लोकतांत्रिक राजनीति की प्रतीक

भारत खुद को दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का समर्थक मानता है. खालिदा जिया का राजनीतिक सफरचाहे सत्ता में रहना हो या विपक्ष में संघर्ष भारत के लिए यह दर्शाता रहा कि बांग्लादेश की राजनीति सिर्फ एक ध्रुव पर नहीं टिकी है.

उनकी मौजूदगी से भारत को यह भरोसा मिलता था कि बांग्लादेश में राजनीतिक संतुलन और लोकतांत्रिक विकल्प बने रहेंगे.

भारत-बांग्लादेश संबंधों में स्थिरता की भूमिका

खालिदा जिया ने अपने कार्यकाल में व्यापार, ट्रांजिट और लोगों के आपसी संपर्क जैसे मुद्दों पर भारत से रिश्ते पूरी तरह खराब नहीं होने दिए. यही वजह है कि उनके निधन पर भारत सरकार ने औपचारिक शोक जताया और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अंतिम संस्कार में भेजने का फैसला किया, यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि कूटनीतिक सम्मान का संकेत भी है.

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