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'सेवा तीर्थ' के नाम से जाना जाएगा प्रधानमंत्री कार्यालय का नया कैंपस, 78 साल बाद PM का नया पावर सेंटर

नया प्रधानमंत्री कार्यालय अब साउथ ब्लॉक से शिफ्ट होकर सेवा तीर्थ नाम के आधुनिक परिसर में काम करेगा, जिसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है. यह कॉम्प्लेक्स कैबिनेट सचिवालय, NSCS और इंडिया हाउस जैसे अहम दफ्तरों को एक जगह लाएगा. सरकार का कहना है कि यह बदलाव सत्ता से सेवा की सोच और नागरिक-प्रथम गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम है.

Seva Teerth: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) जल्द ही अपने 78 साल पुराने साउथ ब्लॉक वाले पते को अलविदा कहने वाला है. सरकार ने तय किया है कि प्रधानमंत्री का दफ्तर अब एक बिल्कुल नए, अत्याधुनिक और बड़े परिसर में शिफ्ट होगा, जिसका नाम होगा सेवा तीर्थ (Seva Teerth). यह वही नया कॉम्प्लेक्स है जो सेंट्रल विस्टा री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है.

सरकार का कहना है कि यह सिर्फ एक इमारत का बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता से सेवा की सोच की ओर बढ़ने का प्रतीक है.

नीचे पढ़िए नई इमारत, उसके महत्व और बदलती सरकारी सोच पर डिटेल रिपोर्ट...

सेवा तीर्थ की खासियत

नई इमारत के तीन बड़े ब्लॉक्स बनाए गए हैं, जिनमें से PMO सेवा तीर्थ-1 में काम करेगा. यह कॉम्प्लेक्स वायु भवन के पास बनाया गया है और इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि प्रधानमंत्री से जुड़े सभी प्रमुख विभाग  कैबिनेट सचिवालय, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय और इंडिया हाउस एक ही जगह पर काम कर सकें.

इससे सरकार के टॉप लेवल पर फैसलों की गति, समन्वय और सुरक्षा तीनों में बड़ा सुधार आएगा.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा

यह पूरा परिसर सेंट्रल विस्टा री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत तैयार हो रहा है। पहले इसे एक्ज़ीक्यूटिव एंक्लेव के नाम से जाना जाता था. अब इसका नया नाम सेवा तीर्थ रखा गया है, एक ऐसी जगह जहां सरकारी फैसले देश की सेवा के उद्देश्य से लिए जाएंगे.

अधिकारियों के अनुसार, भारत के सार्वजनिक संस्थान एक शांत लेकिन गहरा बदलाव देख रहे हैं. हर इमारत, हर जगह और हर नाम में सेवा, कर्तव्य और पारदर्शिता का संदेश छिपा है.

सत्ता से सेवा की ओर बड़ा बदलाव

सरकार का संदेश स्पष्ट है शासन की सोच अब सत्ता (Power) से सेवा (Service) की तरफ बढ़ रही है. प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में शासन के स्थानों और नामों को बदला गया है ताकि वे कर्तव्य और जन-सेवा की भावना को दर्शा सकें.

अधिकारियों का कहना है कि हर नाम, हर बिल्डिंग अब एक ही विचार की ओर इशारा करती है, सरकार जनता की सेवा के लिए है.

बदले जा चुके हैं कई बड़े सरकारी स्थानों के नाम 

यह बदलाव सिर्फ PMO तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में कई ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक सरकारी जगहों के नाम बदले गए हैं:

राजपथ से कर्तव्य पथ

राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक की सड़क, जिसे पहले राजपथ कहा जाता था, अब कर्तव्य पथ है, एक ऐसा नाम जो ‘शक्ति के प्रतीक’ से हटकर कर्तव्य के भाव को दर्शाता है.

प्रधानमंत्री आवास: लोक कल्याण मार्ग

2016 में PM के आधिकारिक आवास का नाम लोक कल्याण मार्ग रखा गया. एक ऐसा नाम जो वेलफेयर और जनसेवा का संदेश देता है.

राज भवनों का नाम: लोक भवन

देश भर के राज्यपालों के आवास भी लोक भवन नाम से जाने जा रहे हैं, जो जनता के करीब शासन को दिखाता है.

सेंट्रल सचिवालय: कर्तव्य भवन

नई इमारत को कर्तव्य भवन नाम दिया गया है, जो सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी और सेवा भावना को दर्शाता है.

अधिकारियों के अनुसार, नाम बदलना सिर्फ औपचारिकता नहीं है, यह सोच बदलने की दिशा में बड़ा कदम है. आज सरकारी संस्थान सेवा, कर्तव्य और नागरिक-प्रथम गवर्नेंस की भाषा बोलते हैं.

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