बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर गुस्से में भारत, MEA ने दे दिया अल्टिमेटम - दोषियों को मिले कड़ी सज़ा
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश से दोषियों को सज़ा दिलाने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. इस मामले में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच जारी है.
MEA on Bangladesh Lynching: भारत में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने रविवार को कहा कि भारत ने बांग्लादेश सरकार से साफ तौर पर मांग की है कि बांग्लादेश में पीट-पीटकर मारे गए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाए.
MEA ने यह भी स्पष्ट किया कि नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन की सुरक्षा से किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ और न ही किसी ने हाई कमीशन की बाड़ तोड़ने या सुरक्षा घेराव में घुसने की कोशिश की.
Our response to media queries regarding the reported demonstration in front of the Bangladesh High Commission in New Delhi on 20 December 2025 ⬇️
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अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर भारत की चिंता
रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में तेजी से बदलती स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. भारतीय अधिकारी बांग्लादेशी प्रशासन के संपर्क में हैं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर अपनी गहरी चिंता साफ तौर पर जता चुके हैं. उन्होंने कहा कि दीपू चंद्र दास की बर्बर हत्या के दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग भारत ने औपचारिक रूप से रखी है.
हाई कमीशन घटना पर 'भ्रामक प्रचार' का आरोप
MEA प्रवक्ता ने बांग्लादेशी मीडिया के कुछ हिस्सों पर भ्रामक प्रचार फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर को लगभग 20 से 25 युवाओं का एक छोटा समूह नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर इकट्ठा हुआ था. ये लोग बांग्लादेश के मयमनसिंह इलाके में दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या के विरोध में नारे लगा रहे थे और साथ ही बांग्लादेश में सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग कर रहे थे.
जायसवाल ने साफ कहा कि किसी भी समय हाई कमीशन की बाड़ तोड़ने या सुरक्षा स्थिति पैदा करने की कोई कोशिश नहीं हुई. मौके पर तैनात पुलिस ने कुछ ही मिनटों में लोगों को वहां से हटा दिया. उन्होंने यह भी कहा कि पूरी घटना के वीडियो सबूत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं. भारत वियना कन्वेंशन के तहत अपने क्षेत्र में मौजूद सभी विदेशी मिशनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
कौन थे दीपू चंद्र दास?
दीपू चंद्र दास बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका इलाके में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले युवा हिंदू मजदूर थे. उन पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उग्र भीड़ ने उन्हें बांधकर बेरहमी से पीटा. हत्या के बाद उनका शव पेड़ से लटकाया गया और आग के हवाले कर दिया गया. यह पूरी घटना हजारों लोगों की मौजूदगी में हुई, जिसने बांग्लादेश में कानून व्यवस्था और भीड़तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
ईशनिंदा के आरोपों का नहीं मिला कोई सबूत
हालांकि, बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) के एक वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद सामस्सुज्ज़मान ने अखबार द डेली स्टार को बताया कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि दीपू चंद्र दास ने फेसबुक या कहीं और कोई ऐसा बयान दिया हो, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हों.
उन्होंने कहा कि न तो स्थानीय लोग और न ही फैक्ट्री के अन्य कर्मचारी किसी भी तरह की ईशनिंदा की पुष्टि कर पाए हैं. अधिकारी के मुताबिक, अब तक ऐसा कोई व्यक्ति सामने नहीं आया है जिसने खुद दीपू को ऐसा कुछ कहते या करते देखा हो.
भीड़ ने फैक्ट्री से बाहर निकालकर की हत्या
RAB अधिकारी ने बताया कि युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हालात पहले से ही तनावपूर्ण थे. इसी दौरान हालात बिगड़ने पर दीपू चंद्र दास को फैक्ट्री की सुरक्षा के नाम पर जबरन बाहर निकाल दिया गया. इसके बाद भीड़ ने लाठियों और देसी हथियारों से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी और शव को पेड़ से लटकाकर जला दिया.
सात आरोपी गिरफ्तार, केस दर्ज
इस मामले में रैपिड एक्शन बटालियन ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार लोगों की पहचान एमडी लिमोन सरकार, एमडी तारेक हुसैन, एमडी मानिक मिया, एरशाद अली, निजुम उद्दीन, आलमगीर हुसैन और एमडी मिराज हुसैन आकोन के रूप में हुई है.
मयमनसिंह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (प्रशासन और वित्त) मोहम्मद अब्दुल्ला अल मामुन ने बताया कि इस घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है और कुछ लोगों से पूछताछ भी की जा रही है.
कुल मिलाकर, दीपू चंद्र दास की हत्या ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं भारत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग दोहराई है.
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