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बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बंद, सनातन परंपरा की रक्षा पर बड़ा फैसला

उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में अब केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी. बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने चारधाम के तहत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने का फैसला किया है. यह प्रस्ताव जल्द होने वाली समिति की बैठक में पास किया जाएगा, जबकि बदरीनाथ के कपाट 23 अप्रैल और केदारनाथ के कपाट महाशिवरात्रि पर खुलने की घोषणा होगी.

Badrinath Kedarnath entry ban: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है. अब इन दोनों प्राचीन मंदिरों में केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्णय लिया गया है. यह जानकारी इन मंदिरों का प्रबंधन करने वाली संस्था बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने दी है.

मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि यह नियम केवल बदरीनाथ और केदारनाथ धाम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि BKTC के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव जल्द ही मंदिर समिति की आगामी बोर्ड बैठक में औपचारिक रूप से पारित किया जाएगा, जिसके बाद इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा.

मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य

बताया जा रहा है कि यह निर्णय मंदिरों की धार्मिक परंपराओं, आस्था और सनातन संस्कृति की मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। मंदिर समिति का मानना है कि चारधाम यात्रा केवल पर्यटन नहीं, बल्कि एक गहरी धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा है, जिसे उसकी मूल भावना के साथ संरक्षित रखना जरूरी है.

23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

इस बीच, बदरीनाथ धाम के कपाट 6 महीने की शीतकालीन बंदी के बाद 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे. वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख की घोषणा महाशिवरात्रि के अवसर पर की जाएगी. हर साल सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण इन मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं.

गौरतलब है कि बदरीनाथ और केदारनाथ के अलावा छोटा चारधाम यात्रा में शामिल अन्य दो प्रमुख धाम गंगोत्री और यमुनोत्री भी हैं. इन दोनों धामों के कपाट अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 19 अप्रैल को खोले जाएंगे.

चारधाम यात्रा को लेकर इस नए नियम के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस फैसले का चारधाम यात्रा और श्रद्धालुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है, लेकिन इतना तय है कि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं में यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

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