सिर दर्द क्यों होता है जबकि दिमाग को दर्द नहीं होता महसूस? जानिए हेडेक के पीछे की पूरी साइंटिफिक स्टोरी
सिर दर्द दिमाग में नहीं बल्कि उसके आसपास मौजूद नसों और रक्त नलिकाओं की वजह से होता है. तनाव, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, हार्मोन बदलाव और माइग्रेन सिर दर्द के बड़े कारण हैं. सही दिनचर्या, समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह से सिर दर्द को कंट्रोल किया जा सकता है.
Headache Mystery: तेज चुभने वाला दर्द हो या फिर धीमा लेकिन लगातार धड़कता हुआ सिर दर्द—हेडेक आपका पूरा दिन खराब कर सकता है. कई बार ऐसा लगता है जैसे सिर को किसी ने जकड़ लिया हो या वह फटने वाला हो. लेकिन हैरानी की बात यह है कि हमारा दिमाग खुद दर्द महसूस ही नहीं करता. फिर सवाल उठता है कि जब दिमाग को दर्द होता ही नहीं, तो सिर दर्द आखिर होता क्यों है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिर दर्द एक जटिल समस्या है और इसे लेकर अभी भी कई बातें पूरी तरह साफ नहीं हैं. हालांकि, रिसर्च में यह जरूर पता चला है कि सिर दर्द पैदा होने में शरीर के कुछ खास सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं.
सिर दर्द होता क्या है?
हमारे शरीर में नसें (नर्व्स) दर्द जैसी जानकारी को बिजली के संकेतों के जरिए दिमाग तक पहुंचाती हैं. दिमाग खुद दर्द को महसूस नहीं करता, क्योंकि उसमें दर्द महसूस करने वाले सेंसर नहीं होते. लेकिन दिमाग के आसपास मौजूद ब्लड वेसल्स, सिर की नसें और दिमाग की सुरक्षा करने वाली संरचनाएं दर्द को महसूस कर सकती हैं.
जब इन हिस्सों को किसी तरह की चोट, सूजन या तनाव महसूस होता है, तो ये कुछ रसायन छोड़ते हैं. ये रसायन नसों के जरिए दिमाग को संकेत भेजते हैं कि सिर में दर्द हो रहा है. इसके बाद दिमाग शरीर को प्रतिक्रिया देने के लिए कहता है, जिससे थकान, आंखों से पानी आना, नाक बहना, उलझन, मतली या तेज रोशनी और तेज आवाज से परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये लक्षण शायद इसलिए विकसित हुए ताकि इंसान अपने शरीर का ज्यादा ध्यान रखे और आगे चलकर सिर दर्द से बच सके.
सिर दर्द की असली वजह क्या है?
अक्सर सिर दर्द इस बात का संकेत होता है कि शरीर किसी न किसी तरह के तनाव में है. यह तनाव शरीर और दिमाग के आसपास मौजूद नसों और रक्त नलिकाओं में बदलाव लाता है, जिससे दर्द शुरू हो जाता है.
सिर दर्द के कई कारण हो सकते हैं. जैसे किसी तरह का संक्रमण, एलर्जी, नींद पूरी न होना, शरीर में पानी की कमी, समय पर खाना न खाना या फिर ज्यादा कैफीन और शराब का सेवन. हार्मोन में बदलाव, खासकर किशोरावस्था या महिलाओं में पीरियड्स के दौरान, भी सिर दर्द की वजह बन सकते हैं.
मानसिक तनाव भी सिर दर्द का बड़ा कारण है. चिंता, डिप्रेशन या भावनात्मक दबाव में रहने से भी सिर भारी और दर्द भरा महसूस हो सकता है. मौसम में बदलाव, खासकर साइनस पर दबाव पड़ने से भी सिर दर्द हो जाता है.
माइग्रेन: जब सिर दर्द बन जाए बड़ी परेशानी
हर 11 में से एक बच्चा और बड़ी संख्या में वयस्क माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या से जूझते हैं. माइग्रेन में सिर के एक या दोनों तरफ तेज धड़कता हुआ दर्द होता है। इसके साथ मतली, उलटी, रोशनी और आवाज से ज्यादा परेशानी जैसी दिक्कतें भी होती हैं.
माइग्रेन के दौरान रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि हल्की-सी गतिविधि भी दर्द बढ़ा सकती है. कई लोगों को दर्द शुरू होने से पहले और दर्द खत्म होने के बाद भी कमजोरी, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस होती है.
माइग्रेन तब होता है जब दर्द से जुड़े नसों और सिस्टम ठीक से काम नहीं करते. ऐसे में हल्की उत्तेजना भी तेज दर्द में बदल जाती है. इसके पीछे पर्यावरण और जेनेटिक कारण दोनों जिम्मेदार होते हैं. जिन परिवारों में पहले से माइग्रेन की समस्या रही हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है.
सिर दर्द का इलाज और बचाव कैसे करें?
सिर दर्द का सही इलाज तभी संभव है जब यह समझा जाए कि आपको किस तरह का हेडेक हो रहा है. माइग्रेन जैसी समस्याएं अक्सर लोगों को डॉक्टर के पास जाने पर मजबूर कर देती हैं.
सिर दर्द से बचने के लिए कुछ आसान उपाय काफी मददगार हो सकते हैं. जैसे दिनभर पर्याप्त पानी पीना, कैफीन का सीमित सेवन करना और समय पर खाना खाना. नियमित नींद, संतुलित दिनचर्या और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी सिर दर्द के खतरे को कम करती हैं.
अक्सर दर्द निवारक दवाएं जैसे इबुप्रोफेन से आराम मिल जाता है, लेकिन कई मामलों में डॉक्टर की दी गई दवाओं की जरूरत पड़ती है. कुछ दवाएं सिर दर्द को कंट्रोल करने या बार-बार होने से रोकने में भी मदद करती हैं.
इसके अलावा फिजिकल थेरेपी, माइंड रिलैक्सेशन थेरेपी और यहां तक कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी सिर दर्द के इलाज में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर राहत देते हैं.
डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है?
अगर सिर दर्द नया है, अचानक बहुत तेज है या पहले से अलग तरह का महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से बात करना जरूरी है. कई बार दिमाग की स्कैनिंग या ब्लड टेस्ट करवाकर किसी गंभीर बीमारी की संभावना को खारिज करना पड़ता है.
डॉक्टरों का कहना है कि सिर दर्द की समस्या को जितनी जल्दी पहचाना जाए, उतना ही बेहतर इलाज संभव होता है. सही समय पर सही इलाज न सिर्फ दर्द से राहत देता है, बल्कि भविष्य में होने वाले सिर दर्द के जोखिम को भी कम कर सकता है.










