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अब वकील साहब की जुबान पर लगाम! कोर्ट में नहीं चलेगी अनंत बहस, सुप्रीम कोर्ट ने लागू किया Oral Argument SOP

सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार मौखिक बहस के लिए समय-सीमा तय करने को लेकर SOP जारी किया है. अब वकीलों को सुनवाई से पहले बहस की समय-सीमा और 5 पेज की लिखित दलील जमा करनी होगी. इस कदम का मकसद अदालत का बेहतर प्रबंधन और न्याय की तेज़ प्रक्रिया सुनिश्चित करना है.

Supreme Court oral arguments rule: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, अनुशासित और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है. पहली बार शीर्ष अदालत ने सभी मामलों में मौखिक बहस (Oral Arguments) के लिए समय-सीमा तय करने को लेकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP जारी किया है. यह नया नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है.

अब पहले से बतानी होगी बहस की समय-सीमा

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक, अब सीनियर एडवोकेट, बहस करने वाले वकील या एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड को यह बताना होगा कि वे अदालत में कितनी देर तक मौखिक बहस करेंगे. यह जानकारी उन्हें केस की सुनवाई शुरू होने से कम से कम एक दिन पहले देनी होगी.

यह समय-सीमा सुप्रीम कोर्ट के उस ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जमा करनी होगी, जहां पहले से ही एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के लिए अपीयरेंस स्लिप भरने की सुविधा उपलब्ध है.

लिखित दलील भी अनिवार्य, वो भी तय सीमा में

नए SOP के तहत अब बहस करने वाले वकीलों और सीनियर एडवोकेट्स को सुनवाई से पहले लिखित दलील भी दाखिल करनी होगी. यह लिखित सबमिशन अधिकतम 5 पेज का होगा और इसे सुनवाई से कम से कम तीन दिन पहले कोर्ट में जमा करना अनिवार्य होगा.

साथ ही, इस लिखित दलील की एक प्रति दूसरे पक्ष को भी पहले से देना जरूरी होगा, ताकि दोनों पक्ष पूरी तैयारी के साथ अदालत में पेश हो सकें.

समय-सीमा का सख्ती से पालन अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि एक बार जो समय-सीमा तय हो जाएगी, सभी वकीलों को उसी के भीतर अपनी मौखिक बहस पूरी करनी होगी. अदालत की अनुमति के बिना तय समय से ज्यादा बहस की इजाजत नहीं दी जाएगी.

क्यों लाया गया यह नया SOP

सुप्रीम कोर्ट ने अपने सर्कुलर में बताया कि इस SOP का मकसद अदालत के कामकाज को बेहतर ढंग से मैनेज करना, जजों के कार्य समय का समान और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना और न्याय की प्रक्रिया को तेज करना है.

मुख्य न्यायाधीश और सभी न्यायाधीशों के निर्देश पर जारी यह SOP न्यायिक व्यवस्था में देरी को कम करने और मामलों के जल्द निपटारे की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली में अनुशासन और पारदर्शिता लाएगा. साथ ही, लंबी और अनावश्यक बहसों पर भी लगाम लगेगी, जिससे आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत होगी.

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