वंदे मातरम से SIR और नेशनल हेराल्ड FIR तक…मोदी सरकार और विपक्ष आमने-सामने, आज से शीतकालीन सत्र शुरू
शीतकालीन सत्र शुरू होते ही केंद्र और विपक्ष के बीच नेशनल हेराल्ड FIR और मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा राजनीतिक टकराव तय है. TMC, DMK और SP ने चुनाव आयोग पर केंद्र के दबाव का आरोप लगाते हुए संसद में जोरदार लड़ाई की तैयारी कर ली है. सत्र छोटा होने के बावजूद विवाद बढ़ने से सरकार के 10 अहम बिलों पर भी संकट मंडरा रहा है.
Parliament Winter Session: देश की संसद का सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में तनाव गहरा चुका है. केंद्र सरकार और विपक्ष इस बार दो बड़े मुद्दों गांधी परिवार के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस की एफआईआर और देशभर में चल रहे विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) का विवाद पर आमने-सामने हैं. सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में इन दोनों मुद्दों पर जोरदार टकराव लगभग तय माना जा रहा है.
voter list संशोधन में राजनीतिक दखल के आरोप
तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और समाजवादी पार्टी (SP) ने साफ कर दिया है कि वे SIR के मुद्दे को इस सत्र में बेहद आक्रामक अंदाज़ में उठाएंगे. विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग के इस विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण पर केंद्र सरकार का दबाव है और इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं.
सड़कों पर प्रदर्शन करने के बाद अब विपक्ष संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है. उनकी मांग है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप पर चर्चा हो और SIR को रोककर जांच करवाई जाए.
संक्षिप्त विंटर सेशन और सरकार की चिंता
इस बार का शीतकालीन सत्र पहले से ही बहुत छोटा है, 19 दिसंबर को खत्म हो जाएगा. ऐसे में विपक्ष के लगातार हंगामे की आशंका से सरकार का विधायी एजेंडा पूरी तरह ठप हो सकता है.
केंद्र सरकार इस सत्र में 10 अहम बिल पेश करने की तैयारी में है, जिनमें न्यूक्लियर एनर्जी सुधार, उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव, कॉर्पोरेट कानून में संशोधन और सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं. सरकार चाहती है कि कम समय में अधिक काम हो, लेकिन विपक्ष की रणनीति साफ है, पहले SIR पर जवाब, फिर कोई काम.
'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा
सरकार इस सत्र में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर एक विशेष चर्चा चाहती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दावा किया था कि 1937 में कांग्रेस ने गीत की कुछ पंक्तियां हटाई थीं और यह कदम देश के बंटवारे के बीज बोने जैसा था. इस बयान के बाद यह पूरा मुद्दा बेहद राजनीतिक हो चुका है.
सरकार चाहती है कि संसद में वंदे मातरम की पूरी रचना पर चर्चा हो, जबकि विपक्ष का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ भावनाएं भड़काने के लिए उठाया जा रहा है.
केंद्र का साफ संदेश - SIR पर चर्चा नहीं होगी
केंद्र ने पहले ही साफ कर दिया है कि SIR का मुद्दा संसद में बहस योग्य नहीं है. उनका कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और यह किसी भी तरह से संसद के दायरे में नहीं आता. सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रक्रिया पर अपने निर्देश दिए हैं और आयोग उन्हीं के अनुसार काम कर रहा है.
केंद्र का यह भी दावा है कि बिहार चुनाव में NDA की बड़ी जीत से साबित होता है कि जनता SIR को कोई मुद्दा नहीं मानती, लेकिन विपक्ष की राय बिल्कुल उलट है.
TMC की आक्रामक तैयारी
पश्चिम बंगाल में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, और TMC का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूचियों में गड़बड़ियां कराई जा रही हैं. उनका दावा है कि कई जगहों पर बूथों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ाई जा रही है और सूची में ऐसे नाम जोड़े जा रहे हैं जिन पर संदेह है.
ममता बनर्जी ने साफ कहा है कि SIR केंद्र की साजिश है, जिसका उद्देश्य बंगाल के चुनावों को प्रभावित करना है. इस वजह से TMC संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह बेहद आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर चुकी है.
दक्षिण से उत्तर तक विवाद की लहर
तमिलनाडु में भी अगले साल चुनाव होने हैं और वहां की सत्तारूढ़ DMK का आरोप है कि केंद्र SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल राज्य की राजनीति को प्रभावित करने के लिए कर रहा है.
उधर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने SIR में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि वे इस मुद्दे को संसद के भीतर सबसे ज़ोरदार तरीके से उठाएंगे. उनका कहना है कि मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ लोकतंत्र पर सीधा हमला है.
सिर्फ SIR नहीं, कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
विपक्ष केवल SIR तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह संसद में इन मुद्दों पर भी बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहा है:
- न्यूक्लियर एनर्जी सुधार
- इंडियन हायर एजुकेशन कमीशन
- चंडीगढ़ से जुड़ा संवैधानिक संशोधन
- बेरोज़गारी
- दिल्ली-NCR की गंभीर होती वायु प्रदूषण समस्या
- देश की आर्थिक स्थिति
- विदेश नीति में कथित असफलताएं
कांग्रेस नेता इसे बहुत छोटा सत्र बताते हुए आरोप लगा रहे हैं कि सरकार खुद चर्चा से बचने के लिए सत्र को छोटा रख रही है.
ऑल-पार्टी मीटिंग में ही भिड़ंत
सत्र शुरुआत से ठीक पहले हुई सर्वदलीय बैठक भी टकराव से भरी रही. सूत्रों के मुताबिक, SP और TMC ने SIR पर संसद में चर्चा की ज़रूरत पर जोर दिया, जबकि JDU नेता संजय झा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पिछले सत्र का पूरा समय इसी मुद्दे में बर्बाद हो गया था.
RJD के मनोज झा ने संजय झा की बात का जोरदार विरोध किया। इससे मीटिंग में माहौल और गर्म हो गया.
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि यह सत्र इतिहास का सबसे छोटा सत्र है और इसकी वजह है कि सरकार खुद चर्चा से भाग रही है. उन्होंने कहा कि विपक्ष दिल्ली धमाके से लेकर SIR, जलवायु संकट, अर्थव्यवस्था, मजदूरों की सुरक्षा, बाढ़ प्रबंधन और विदेश नीति की असफलताओं पर चर्चा चाहता है.
गोगोई के अनुसार, विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में एक संयुक्त रणनीति तैयार की गई है.
नतीजा क्या निकलने वाला है?
सरकार अपने 10 अहम विधेयकों पर आगे बढ़ना चाहती है, जबकि विपक्ष SIR और कई बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए तैयार बैठा है. दोनों पक्ष अपनी-अपनी जमीन पर अडिग दिखते हैं. ऐसे में यह तय है कि जब सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू होगी, तब माहौल शांत नहीं रहेगा. शीतकालीन सत्र नाम का जरूर है, लेकिन यह काफी गरम होने वाला है.
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