'डेड गैलेक्सी' क्या है, जहां 70 करोड़ साल बाद तारे बनने हो गए थे बंद? दिमाग हिला देगा एस्ट्रोनॉमर्स की ये खोज
Dead Galaxy: 'डेड गैलेक्सी' (Dead Galaxy) का मतलब एक ऐसी आकाशगंगा (Galaxy) से होता है, जिसमें अब नए तारे नहीं बन रहे होते. सामान्यत: गैलेक्सियां गैस और धूल से भरी होती हैं, जिनसे नए तारे (Stars) बनते रहते हैं. लेकिन 'डेड गैलेक्सी' में ये गैस और धूल खत्म हो जाती है या इतनी ठंडी हो जाती है कि नए तारों का निर्माण रुक जाता है. इसलिए इसे 'मृत आकाशगंगा' कहा जाता है.
Dead Galaxy: जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने ब्रह्मांड के इतिहास में सबसे दूर स्थित एक 'डेड गैलेक्सी' की खोज की है, जिसका नाम RUBIES-UDS-QG-z7 (Red Unknowns: Bright Infrared Extragalactic Survey) रखा गया है. यह आकाशगंगा अब नए सितारों का निर्माण नहीं कर रही है. ये 'डेड गैलेक्सी' 13 अरब साल पुरानी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब तक की खोजी गई सबसे विशाल और सबसे दूरस्थ मृत आकाशगंगा यही है.
इस महत्वपूर्ण खोज का नेतृत्व University of Geneva (UNIGE), स्विट्ज़रलैंड के खगोलविदों ने किया है. यूनिवर्सिटी द्वारा 2 अप्रैल 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 'बहुत लंबे समय तक वैज्ञानिकों का मानना था कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में केवल सक्रिय सितारा-निर्माण वाली आकाशगंगाएं ही मौजूद थीं, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप ने दिखाया कि कुछ आकाशगंगाओं ने अपेक्षा से कहीं पहले ही सितारों का निर्माण बंद कर दिया था.'
'डेड गैलेक्सी' क्या होती है?
जब कोई आकाशगंगा नए सितारों का निर्माण करना बंद कर देती है तो उसे 'डेड गैलेक्सी' कहा जाता है. यह तब होता है जब आकाशगंगा में मौजूद हाइड्रोजन जैसे गैसों का भंडार समाप्त हो जाता है, जो नए सितारों के जन्म के लिए आवश्यक होता है. पर्याप्त ठंडी और घनी गैस के बिना, नए सितारे नहीं बन पाते.
इसके अलावा स्टेलर विंड्स, सुपरनोवा विस्फोट, या ब्लैक होल की गतिविधियां भी आकाशगंगा से गैस को बाहर निकाल सकती हैं. नतीजतन, आकाशगंगा में केवल बूढ़े सितारे रह जाते हैं और नई पीढ़ी के सितारे नहीं बनते हैं.
पहले खोजी गई 'डेड गैलेक्सी'
इससे पहले, JADES-GS-z7-01-QU नामक 'डेड गैलेक्सी' को मार्च 2024 में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खोजा गया था, जो तब ब्रह्मांड मात्र 700 मिलियन वर्ष (70 करोड़ साल) पुराना था.
गैलेक्सी कैसे बढ़ती और मरती हैं?
गैलेक्सी गैस को अवशोषित कर नए सितारों के निर्माण से बढ़ती हैं. जैसे-जैसे उनका द्रव्यमान बढ़ता है, वे अधिक गैस खींचने में सक्षम होती हैं, जिससे सितारा निर्माण और तेज हो जाता है.
लेकिन जब गैस की आपूर्ति खत्म हो जाती है या उसे बाहर निकाल दिया जाता है, तो गैलेक्सी 'क्वेंचिंग' (Quenching) प्रक्रिया से गुजरती हैं, जिसमें उनका सितारा निर्माण पूरी तरह बंद हो जाता है. विशेष रूप से विशाल अण्डाकार आकाशगंगाएं इस प्रक्रिया के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं.
University of Geneva के अनुसार, 'प्रारंभिक ब्रह्मांड में उन विशाल आकाशगंगाओं की पहचान करना, जिन्होंने सितारे बनाना बंद कर दिया था, खगोल भौतिकी में एक बड़ा कदम है.'
RUBIES-UDS-QG-z7 का क्या महत्व है?
करीब 650 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित RUBIES-UDS-QG-z7, अपने छोटे आकार के बावजूद बहुत घनी stellar mass रखती है. यह उन प्राचीन और विशाल अण्डाकार आकाशगंगाओं (गैलेक्सी) के केंद्र बनने की संभावना रखती है, जो आज के ब्रह्मांड में दिखाई देती हैं.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, 'यह गैलेक्सी 15 अरब सौर द्रव्यमान के बराबर सितारे बना चुकी थी, लेकिन फिर भी सितारा निर्माण अचानक रुक गया.' इसका अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि आखिर आकाशगंगाएं कब और कैसे 'मृत' हो जाती है.
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