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ChatGPT की रफ्तार! दो साल में पहुंचा 365 अरब सर्च, जानिए Google से कितना गुना है तेज़

ChatGPT VS Google: ChatGPT ने लॉन्च के सिर्फ दो साल में 365 अरब सालाना सर्च का आंकड़ा पार कर लिया है, जो इसे तकनीकी इतिहास का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला प्लेटफॉर्म बनाता है. ChatGPT की ग्रोथ Google की शुरुआती ग्रोथ से पांच गुना तेज़ रही है. हालांकि, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ChatGPT को पहले से तैयार डिजिटल इकोसिस्टम, स्मार्टफोन और इंटरनेट की व्यापक पहुंच का फायदा मिला.

ChatGPT VS Google: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में OpenAI का चैटबॉट ChatGPT हर दिन नए कीर्तिमान बना रहा है. मशहूर टेक विशेषज्ञ मैरी मीकर की ताज़ा रिपोर्ट 'Trends: Artificial Intelligence' के मुताबिक, ChatGPT ने लॉन्च के सिर्फ दो साल में 365 अरब सर्च का आंकड़ा पार कर लिया है — यह Google की शुरुआती रफ्तार से पांच गुना तेज़ है.

मीकर ने रिपोर्ट में बताया, 'ChatGPT की जैसी यूज़र ग्रोथ हमने देखी है, वैसी टेक्नोलॉजी की दुनिया में पहले कभी नहीं देखी गई, खासकर अमेरिका के बाहर. यह दिखाता है कि कैसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रीब्यूशन का स्वरूप बदल गया है.'

Google से तुलना पर बहस

हालांकि, 1998 में लॉन्च हुए गूगल की तुलना ChatGPT से करना थोड़ा मुश्किल है. जब गूगल आया था तब इंटरनेट सीमित था, स्मार्टफोन का अस्तित्व नहीं था और ब्रॉडबैंड का दौर शुरू ही हो रहा था. इसके उलट ChatGPT एक ऐसे समय में आया जब इंटरनेट हर जेब में था, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार था और डिजिटल दुनिया अपने चरम पर थी.

Fortune India की रिपोर्ट बताती है कि यही बात ChatGPT की सफलता की असली वजह है. हर तकनीकी लहर पहले से तेज़ी से अपनाई जा रही है. पर्सनल कंप्यूटर को 50% घरों तक पहुंचने में 20 साल लगे, डेस्कटॉप इंटरनेट को 12, मोबाइल इंटरनेट को 6 और अब AI सिर्फ 3 साल में यह उपलब्धि हासिल करने वाला है.

ChatGPT की रफ्तार, नए युग की शुरुआत

मीकर मानती हैं कि ChatGPT की सफलता का श्रेय केवल उसके फीचर्स को नहीं, बल्कि एक परिपक्व डिजिटल माहौल को जाता है — जहां नए प्रयोग, तेज़ वितरण और यूज़र ऑनबोर्डिंग बहुत आसान हो गया है.

आज ChatGPT के 800 मिलियन साप्ताहिक यूज़र्स हैं और इसका ट्रेनिंग डेटा हर साल 250% की दर से बढ़ रहा है। हालांकि, इस तेजी के साथ चुनौतियां भी आ रही हैं — जैसे कि इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटेशनल लागतें.

मीकर का मानना है कि इन बड़ी AI कंपनियों को अब मजबूत मोनेटाइजेशन मॉडल अपनाने होंगे ताकि इस तेजी से बढ़ती तकनीक को लंबे समय तक टिकाया जा सके.

2030 तक AI हर सेक्टर में देगा दस्तक

इंटरनेट की 'रानी' कहलाई जाने वाली मैरी मीकर ने इससे पहले मोबाइल इंटरनेट, सोशल मीडिया और Amazon-Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स के उदय की सटीक भविष्यवाणी की थी. अब वह कहती हैं कि 2030 तक AI हमारी हेल्थकेयर, शिक्षा और वित्तीय सेवाओं को पूरी तरह पर्सनलाइज़ कर देगा.

वह यह भी मानती हैं कि अगला अरब इंटरनेट यूज़र मोबाइल ऐप्स नहीं, बल्कि AI वॉयस इंटरफेस और सेटेलाइट इंटरनेट के ज़रिए डिजिटल दुनिया से जुड़ेंगे.

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